Last updated: September 25th, 2026 at 10:44 am

भारत की मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने वाली ‘Make in India’ पहल को 12 साल पूरे हो गए हैं। 25 सितंबर 2014 को शुरू हुई इस पहल की वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसके अब तक के सफर और अलग-अलग क्षेत्रों में हुए बदलावों से जुड़े आंकड़े साझा किए। सरकार के मुताबिक, इन 12 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन की क्षमता बढ़ी है।
डिफेंस एक्सपोर्ट में 5,500% से ज्यादा की बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का रक्षा निर्यात वित्त वर्ष 2013-14 में ₹686 करोड़ था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹38,424 करोड़ पहुंच गया। PIB के अनुसार, यह 12 वर्षों में 5,500% से अधिक की वृद्धि है। भारतीय रक्षा उत्पाद अब 80 से ज्यादा देशों को निर्यात किए जा रहे हैं।
रक्षा उत्पादन में भी वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इसमें सार्वजनिक क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 76% और निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 24% रही।
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में बड़ा बदलाव
Make in India के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन निर्माण में भी विस्तार हुआ है। PIB के अनुसार, भारत में इस्तेमाल होने वाले करीब 99.2% मोबाइल फोन अब देश में ही बनाए जाते हैं। भारत मात्रा के आधार पर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता भी है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मोबाइल फोन का उत्पादन 2014-15 में करीब ₹18,900 करोड़ था, जो 2025-26 में बढ़कर करीब ₹6.27 लाख करोड़ हो गया। इसी अवधि में मोबाइल फोन निर्यात भी ₹1,566 करोड़ से बढ़कर करीब ₹2.60 लाख करोड़ पहुंच गया।
27 सेक्टर पर फोकस
सरकार के अनुसार, Make in India 2.0 के तहत अब 27 क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है। इनमें 15 मैन्युफैक्चरिंग और 12 सर्विस सेक्टर शामिल हैं। निवेश और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए Production Linked Incentive (PLI), National Single Window System, PM GatiShakti और India Industrial Land Bank जैसी पहल लागू की गई हैं।
PIB के अनुसार, PLI योजनाओं का उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन और निवेश को बढ़ावा देना है। वहीं Make in India के मौजूदा चरण में सेमीकंडक्टर, मोबाइल फोन, औद्योगिक पार्क, स्पेशलिटी स्टील और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों पर भी जोर दिया जा रहा है।
12 साल पूरे होने के मौके पर सरकार की ओर से पेश किए गए आंकड़ों में उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, निवेश, तकनीक और निर्यात को मजबूत करने पर जोर दिखाई देता है।
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