Last updated: August 19th, 2026 at 02:36 pm

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बिहार समेत कई राज्यों के लिए बुनियादी ढांचे से जुड़े बड़े फैसले लिए हैं। बुधवार, 19 अगस्त 2026 को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में चार रेल परियोजनाओं और बिहार में एक फोरलेन हाईवे परियोजना को मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं पर कुल करीब 13,041 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि बिहार के मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी-सोनवर्षा मार्ग को फोरलेन हाईवे के रूप में विकसित करने की मंजूरी दी गई है। इस परियोजना पर करीब 3,591 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
हावड़ा-चेन्नई रेल रूट को मिलेगी नई रफ्तार
कैबिनेट से मंजूर चार रेल परियोजनाओं में तीन परियोजनाएं हावड़ा-चेन्नई मुख्य रेल मार्ग से जुड़ी हैं। सरकार का लक्ष्य इस महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाना है, ताकि इस रूट पर ज्यादा यात्री और मालगाड़ियां संचालित की जा सकें।
अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, देश के प्रमुख रेल ट्रंक रूट में हावड़ा-चेन्नई मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है। इसे क्वाड्रुपल यानी चार लाइन वाला कॉरिडोर बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे ट्रेनों की आवाजाही बढ़ाने के साथ माल ढुलाई और रेल पटरियों के रखरखाव में भी सुविधा होगी।
खड़गपुर-भद्रक रेल खंड के लिए 3,352 करोड़
मंजूर परियोजनाओं में खड़गपुर से भद्रक के बीच करीब 173 किलोमीटर लंबे रेल खंड को चार लाइन वाला कॉरिडोर बनाने की योजना शामिल है। यह मार्ग बालासोर और रूपसा होते हुए भद्रक तक जाता है।
इस रेल खंड पर कोयला और लौह अयस्क उत्पादक क्षेत्रों से भारी मालगाड़ियों की आवाजाही होती है। इसके अलावा हावड़ा-चेन्नई के बीच चलने वाली मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और यात्री ट्रेनों के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है।
इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3,352 करोड़ रुपये बताई गई है। निर्माण के दौरान 41 बड़े और 169 छोटे पुल बनाए जाने की भी योजना है।
माल ढुलाई और यात्री ट्रेनों दोनों को फायदा
सरकार के मुताबिक, रेल लाइन की क्षमता बढ़ने से इस रूट पर ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू हो सकेगा। मालगाड़ियों की आवाजाही आसान होने के साथ यात्री ट्रेनों के लिए भी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी।
इसके अलावा कैबिनेट ने ओडिशा के पारादीप-कटक रेल खंड से जुड़ी परियोजना को भी मंजूरी दी है। केंद्र सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी और देश के प्रमुख औद्योगिक एवं परिवहन मार्गों को मजबूती मिलेगी।
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