Last updated: August 19th, 2026 at 02:40 pm

तमिलनाडु में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को लेकर जारी सरकारी निर्देश पर विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया है। कॉलेजिएट शिक्षा निदेशालय (DCE) की ओर से जारी आदेश में स्कूल-कॉलेज, पुलिस और जिला प्रशासन को छात्रों को प्रदर्शनों और आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा गया था। हालांकि, करीब 24 घंटे के भीतर ही इस निर्देश को वापस ले लिया गया।
राजनीतिक कार्यक्रमों को लेकर जारी हुआ था निर्देश
बताया गया कि यह निर्देश वामपंथी दलों और तमिलनाडु कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया था। सरकार की ओर से छात्रों को राजनीतिक प्रदर्शनों से दूर रखने के लिए प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए थे।
हालांकि, विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाए। इसे छात्रों के लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों पर अंकुश लगाने की कोशिश बताया गया। विवाद बढ़ने के बाद सरकार ने अपना आदेश वापस लेने का फैसला किया।
नीट मुद्दे पर पहले से चल रहे थे प्रदर्शन
तमिलनाडु में नीट को लेकर पहले से विरोध-प्रदर्शन जारी थे। इसी दौरान विभिन्न छात्र संगठनों की ओर से प्रदर्शन और आंदोलन किए जा रहे थे। ऐसे माहौल में सरकार के निर्देश ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।
इस बीच, पिछले सप्ताह मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को लेकर अहम टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि छात्रों को अपनी राय व्यक्त करने और विरोध दर्ज कराने का मौलिक अधिकार है, भले ही उनकी राय किसी को गलत क्यों न लगे। उन्होंने अपने छात्र जीवन के दौरान छात्र गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का भी उल्लेख किया था।
किसानों के लिए 75 हजार रुपये तक कर्ज माफी का ऐलान
वहीं, तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में किसानों के लिए 75 हजार रुपये तक के सहकारी कृषि ऋण को माफ करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री विजय ने कृषि को राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि किसानों को मजबूत किए बिना समृद्धि की कल्पना नहीं की जा सकती।
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