Last updated: October 13th, 2026 at 07:56 am

नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को दिल्ली हाई कोर्ट से फिलहाल राहत नहीं मिली है। अदालत ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की कुर्क संपत्तियों को छुड़ाने के लिए संबंधित पक्षों को PMLA अपीलीय न्यायाधिकरण जाने से रोकने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। जस्टिस सचिन दत्ता की अदालत ने स्पष्ट किया कि इस चरण पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी जा रही है।
ED ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें गांधी परिवार से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एजेंसी की अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था। संपत्तियों की कुर्की और शिकायत पर संज्ञान के मुद्दे पर कानूनी कार्यवाही जारी है।
ED ने संपत्तियां छुड़ाने की कोशिश का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान ED की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत को बताया कि संबंधित कंपनियां ट्रायल कोर्ट के आदेश का सहारा लेकर कुर्क संपत्तियों को छुड़ाने के लिए PMLA अपीलीय न्यायाधिकरण का रुख कर रही हैं।
एजेंसी चाहती थी कि संपत्तियों को मुक्त कराने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश जारी किया जाए। हालांकि, हाई कोर्ट ने फिलहाल ऐसी रोक नहीं लगाई। इसका अर्थ है कि संपत्तियों को लेकर संबंधित कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है; इसे मामले के अंतिम नतीजे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
ट्रायल कोर्ट ने ED की शिकायत पर संज्ञान क्यों नहीं लिया?
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने 16 दिसंबर 2025 को ED की अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया था। ट्रायल कोर्ट के आदेश के मुताबिक, शिकायत कानून के तहत सुनवाई योग्य नहीं थी, क्योंकि यह PMLA से जुड़े निर्धारित अपराध की FIR पर आधारित नहीं थी।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया था कि मामले की शुरुआत सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत से हुई थी। उस शिकायत पर मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लिया था और आरोपियों को समन जारी किए थे। ED ने ट्रायल कोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का रुख किया है।
सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ ED की कार्रवाई
ED ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को लेकर अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धाराओं 3 और 4 के तहत कार्रवाई की मांग की है। अब हाई कोर्ट में एजेंसी की याचिका पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
यहां ध्यान देना जरूरी है कि ED के आरोप और अदालतों के आदेश अलग-अलग पहलू हैं। हाई कोर्ट की ओर से अंतरिम राहत नहीं दिए जाने को आरोपों की पुष्टि या मामले में अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?
नेशनल हेराल्ड मामला अखबार की प्रकाशक कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (YIL) के बीच हुए लेन-देन से जुड़ा है। YIL की स्थापना 2010 में हुई थी।
ED का आरोप है कि YIL ने कांग्रेस से AJL का करीब 90 करोड़ रुपये का कर्ज लगभग 50 लाख रुपये में हासिल किया था। एजेंसी के मुताबिक, इस लेन-देन के बाद YIL का AJL पर नियंत्रण हो गया। AJL की संपत्तियों का मूल्य 2,000 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी की YIL में बहुमत हिस्सेदारी रही है।
ED का दावा है कि इस व्यवस्था के जरिए AJL की मूल्यवान संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल किया गया और यह लेन-देन मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। हालांकि, ये एजेंसी के आरोप हैं और इन पर अंतिम न्यायिक निर्णय होना बाकी है।
661 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर भी विवाद
मामले में ED ने AJL से जुड़ी लगभग 661 करोड़ रुपये की संपत्तियों के संबंध में भी कुर्की और कब्जे की कार्रवाई की है। अब एक ओर एजेंसी की अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने का विवाद है, तो दूसरी ओर कुर्क संपत्तियों को मुक्त कराने से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया भी जारी है।
दिल्ली हाई कोर्ट का ताजा रुख फिलहाल अंतरिम राहत तक सीमित है। मामले में आगे की सुनवाई और संबंधित अदालतों के आदेश तय करेंगे कि संपत्तियों तथा ED की शिकायत को लेकर कानूनी स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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