Last updated: July 23rd, 2026 at 03:48 pm

NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर संसद के मानसून सत्र में गुरुवार को भी जोरदार हंगामा जारी रहा। लगातार चौथे दिन विपक्ष के विरोध के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही प्रभावित हुई और दोनों सदनों में सामान्य कामकाज नहीं हो सका। विपक्षी दलों ने NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। वहीं, सरकार ने कहा कि वह इस मुद्दे पर संसद में तत्काल चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को चर्चा के लिए कोई पूर्व शर्त नहीं रखनी चाहिए।
गुरुवार को संसद की कार्यवाही शुरू होते ही NEET मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे सहित कई विपक्षी सांसदों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। विपक्ष का कहना है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने गंभीर मामले में सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए और शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि केंद्र सरकार NEET पेपर लीक मामले पर चर्चा के लिए तैयार है। सरकार की ओर से विपक्ष से अपील की गई कि वह बिना किसी शर्त के चर्चा में शामिल हो और संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलने दे। सरकार का तर्क है कि परीक्षा में अनियमितताओं से जुड़े मामलों पर चर्चा के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में सुधार के उपायों पर भी बात की जानी चाहिए।
हालांकि, विपक्ष अपनी मांग पर कायम रहा। विपक्षी नेताओं का कहना है कि चर्चा से पहले शिक्षा मंत्री की राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही तय होनी चाहिए। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षा में कथित पेपर लीक से लाखों छात्रों और उनके परिवारों को नुकसान पहुंचा है। उनका कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में छात्रों का विश्वास बहाल करने के लिए सरकार को इस मामले में स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
राज्यसभा में लगातार हंगामे के कारण कार्यवाही को कई बार स्थगित करना पड़ा। सदन की बैठक शुरू होने के कुछ ही समय बाद कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित की गई। इसके बाद भी गतिरोध समाप्त नहीं हुआ और कार्यवाही को आगे भी स्थगित करना पड़ा। विपक्षी सांसदों के लगातार विरोध के बीच सदन में सामान्य विधायी कामकाज प्रभावित रहा।
लोकसभा में भी NEET मुद्दे को लेकर विपक्ष का विरोध जारी रहा। विपक्षी सांसदों ने सरकार से परीक्षा प्रणाली में कथित खामियों को लेकर जवाब मांगा। संसद में जारी गतिरोध के कारण मानसून सत्र के शुरुआती दिनों में महत्वपूर्ण विधायी कामकाज पर भी असर पड़ा है। लगातार चौथे दिन सदनों की कार्यवाही बाधित होने से सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ गया है।
NEET विवाद अब केवल परीक्षा से जुड़ा मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विपक्ष इस मामले को छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जोड़कर सरकार पर दबाव बना रहा है। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि वह मामले पर चर्चा के लिए तैयार है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, संसद में गतिरोध तब तक जारी रह सकता है जब तक दोनों पक्ष चर्चा की शर्तों पर सहमत नहीं होते। सरकार चाहती है कि NEET मामले पर बिना किसी पूर्व शर्त के चर्चा हो, जबकि विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को अपनी प्राथमिक शर्त बना रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में भी संसद की कार्यवाही पर इसका असर पड़ने की संभावना है।
इस बीच, NEET विवाद से जुड़े छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच भी परीक्षा प्रणाली को लेकर चिंता बनी हुई है। छात्रों की मुख्य मांग है कि प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए, ताकि मेहनत करने वाले उम्मीदवारों के साथ अन्याय न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया में तकनीकी सुरक्षा, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और जवाबदेही की मजबूत व्यवस्था जरूरी है।
संसद में NEET पेपर लीक विवाद को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध जारी है। विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है, जबकि सरकार चर्चा के लिए तैयार होने की बात कह रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या दोनों पक्षों के बीच कोई सहमति बनती है और संसद की कार्यवाही सामान्य रूप से आगे बढ़ पाती है या नहीं।
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