Last updated: July 23rd, 2026 at 03:52 pm

संसद के मानसून सत्र में NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। वहीं, सरकार ने विपक्ष से बिना किसी पूर्व शर्त के चर्चा में शामिल होने की अपील की है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार NEET सहित परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर सदन में चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन संसद की कार्यवाही को बाधित करना उचित नहीं है।
संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने NEET विवाद को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। विपक्ष का कहना है कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं का असर लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़ा है। इसलिए इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए और सरकार को यह बताना चाहिए कि परीक्षा प्रणाली में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से छात्रों का विश्वास प्रभावित होता है। उनका कहना है कि देशभर के लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करके मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करते हैं। यदि परीक्षा प्रक्रिया में कथित पेपर लीक या अन्य अनियमितताएं सामने आती हैं तो योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो सकता है।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। विपक्ष का तर्क है कि इतने बड़े स्तर पर विवाद सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही तय की जानी चाहिए। विपक्षी सांसदों ने कहा कि सरकार को छात्रों और उनके परिवारों की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।
दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि NEET विवाद पर चर्चा से उसे कोई आपत्ति नहीं है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि वह बिना किसी शर्त के चर्चा में शामिल हो। सरकार का कहना है कि संसद में चर्चा के दौरान परीक्षा प्रणाली की खामियों, पेपर लीक के मामलों और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर विस्तार से बात की जा सकती है।
सरकार का यह भी कहना है कि जांच एजेंसियां संबंधित मामलों की जांच कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। सत्ता पक्ष के नेताओं का तर्क है कि संसद में चर्चा के साथ-साथ जांच प्रक्रिया को भी अपना काम करने देना चाहिए। सरकार विपक्ष से आग्रह कर रही है कि वह सदन की कार्यवाही को बाधित करने के बजाय चर्चा के माध्यम से अपनी बात रखे।
हालांकि, विपक्ष सरकार के इस रुख से संतुष्ट नहीं है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि केवल चर्चा के लिए तैयार होने की बात पर्याप्त नहीं है। उनका मानना है कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताएं कैसे हुईं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
संसद में जारी गतिरोध का असर मानसून सत्र के कामकाज पर भी पड़ रहा है। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ रही है। विपक्षी सांसदों के विरोध और सरकार की ओर से चर्चा की पेशकश के बावजूद गतिरोध खत्म नहीं हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, NEET विवाद आने वाले दिनों में संसद में विपक्ष के लिए प्रमुख मुद्दा बना रह सकता है। विपक्ष इसे युवाओं और छात्रों से जोड़कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। वहीं, सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा देकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
इस बीच, छात्रों और अभिभावकों की नजर भी संसद की बहस पर बनी हुई है। उनकी मुख्य चिंता यह है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और विश्वसनीय हो। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, डिजिटल सुरक्षा और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए मजबूत व्यवस्था जरूरी है।
NEET पेपर लीक विवाद को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव जारी है। किरेन रिजिजू ने विपक्ष से बिना शर्त चर्चा में शामिल होने की अपील की है, जबकि विपक्ष अपनी मांगों पर कायम है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों पक्षों के बीच सहमति कब बनती है और संसद में NEET विवाद पर विस्तृत चर्चा कब शुरू हो पाती है।
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