Last updated: October 15th, 2026 at 06:55 am

बिहार में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जेडीयू नेता नीरज कुमार और मोकामा विधायक अनंत सिंह के बीच जारी खींचतान के बीच उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस विवाद पर किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय मतदाताओं के फैसले को सबसे अहम बताया। विजय सिन्हा ने कहा कि यह पढ़े-लिखे लोगों का चुनाव है और आखिरकार जनता ही तय करेगी कि किस उम्मीदवार को जीत मिलनी चाहिए।
अनंत सिंह और नीरज कुमार के विवाद पर क्या बोले विजय सिन्हा?
पटना स्नातक सीट पर चुनावी माहौल के बीच विजय कुमार सिन्हा ने कहा, “यह पढ़े-लिखे लोगों का चुनाव है। वोट जनता देगी ना। जनता मालिक है, वही निर्णय करेगी।” उनके इस बयान को दोनों नेताओं के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान के संदर्भ में देखा जा रहा है।
विजय सिन्हा ने बिहार के भविष्य को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि राज्य में दोबारा अराजकता की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। अच्छे लोगों को आगे आना चाहिए, ताकि बिहार के लोग गौरवान्वित महसूस करें और राज्य समृद्धि की दिशा में आगे बढ़े।
बिहार में बढ़ते अपराध को लेकर पूछे गए सवाल पर उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अपराधियों को बर्दाश्त नहीं करेगी और उन्हें सलाखों के पीछे जाना चाहिए।
अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ क्यों खोला मोर्चा?
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू के मौजूदा विधान पार्षद नीरज कुमार एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं। वह इस सीट से लगातार तीन बार जीत चुके हैं और चौथी बार जीत दर्ज करने की कोशिश में जुटे हैं। एनडीए की ओर से उनके समर्थन में प्रचार किए जाने के बीच अनंत सिंह का विरोध चुनावी चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
मोकामा विधायक अनंत सिंह ने नीरज कुमार के समर्थन में प्रचार करने से दूरी बनाई है। वह जन सुराज समर्थित उम्मीदवार डॉ. अनुज सिंह के पक्ष में समर्थन जता चुके हैं और उनके लिए प्रचार भी कर रहे हैं।
अनंत सिंह का आरोप है कि नीरज कुमार ने कई मौकों पर उनका विरोध किया और पार्टी के भीतर उनकी बातों को नजरअंदाज किया गया। इस घटनाक्रम ने पटना स्नातक सीट के चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है।
नीरज कुमार भी प्रचार में जुटे
दूसरी ओर, नीरज कुमार अपने चुनाव अभियान के जरिए मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं तक पहुंचने में लगे हैं। वह गठबंधन के समर्थन और संगठन की ताकत के भरोसे चुनाव जीतने की कोशिश कर रहे हैं। उनके लिए चुनौती यह है कि पार्टी के भीतर सामने आए मतभेदों के बीच समर्थकों को एकजुट रखा जाए।
इस सीट पर कई उम्मीदवारों के मैदान में होने से मुकाबला बहुकोणीय माना जा रहा है। ऐसे में उम्मीदवारों का व्यक्तिगत संपर्क, राजनीतिक संगठन और स्थानीय समीकरण चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
मतदाताओं के फैसले पर टिकी निगाहें
पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में अनंत सिंह की नाराजगी, नीरज कुमार का पुराना चुनावी आधार और एनडीए की संगठनात्मक ताकत चर्चा के केंद्र में हैं। विजय कुमार सिन्हा ने अपने बयान के जरिए साफ किया कि अंतिम फैसला मतदाताओं को ही करना है।
अब देखना होगा कि चुनाव में राजनीतिक मतभेदों का कितना असर पड़ता है और मतदाता किस उम्मीदवार पर भरोसा जताते हैं। फिलहाल, पटना स्नातक सीट पर मुकाबले के साथ-साथ नेताओं के बयान भी बिहार की राजनीति में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
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