Last updated: June 28th, 2026 at 01:37 pm

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 135वें एपिसोड को रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में सामूहिक रूप से सुना गया। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन, पूर्व मंत्री नीरज कुमार बबलू, महाचंद्र प्रसाद सिंह सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में शाहनवाज हुसैन ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाने वाले लोगों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के संदेशों को देशभर में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और लोगों से बदलते वैश्विक हालात के बीच सतर्क रहने की भी अपील की गई।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने आगामी गणेश उत्सव के दौरान देश की मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं के उपयोग पर विशेष जोर दिया। उनका कहना था कि इससे स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
पूर्व मंत्री नीरज कुमार बबलू ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और संस्कृत भाषा की वैश्विक स्वीकार्यता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देशों में भारतीय संस्कृति और संस्कृत के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने महाराष्ट्र के नांदेड़ के एक परिवार की भी सराहना की, जिसने विवाह समारोह में शामिल होने वाले 3500 लोगों के लिए दुर्घटना बीमा कराया। उन्होंने इसे सामाजिक जिम्मेदारी का बेहतरीन उदाहरण बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से बीमा योजनाओं से जुड़ने की अपील की।
प्रधानमंत्री ने हाल के महीनों में देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की बचत, कार पूलिंग और अनावश्यक सोना खरीदने से बचने की अपील का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना में शामिल किए गए नए युद्धपोतों का जिक्र करते हुए देश की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूत होने का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्राचीन विश्वविद्यालय अब आधुनिक स्वरूप में ज्ञान और संवाद की नई परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने अपने दीक्षांत समारोह में ‘शास्त्रार्थ’ की भारतीय परंपरा को शामिल किया है, जो तर्क, संवाद और विचार-विमर्श की समृद्ध संस्कृति को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण कदम है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि शास्त्रार्थ केवल अपनी बात रखने का माध्यम नहीं, बल्कि दूसरों के विचारों को सुनने, समझने और तथ्यों के आधार पर सार्थक संवाद स्थापित करने की एक महत्वपूर्ण परंपरा है।
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