Last updated: June 28th, 2026 at 02:11 pm

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए भारत और सेशेल्स के बीच दशकों पुराने मजबूत और भरोसेमंद संबंधों को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
पीएम मोदी ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का विषय है कि वे इस प्रतिष्ठित सदन को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने भारत के 1.4 अरब नागरिकों की ओर से शुभकामनाएं प्रेषित कीं और बताया कि 2015 में हिंद महासागर क्षेत्र की अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए उन्होंने सेशेल्स को ही चुना था, जो दोनों देशों के विशेष संबंधों को दर्शाता है।
‘सरकारों से नहीं, लोगों से बने रिश्ते’
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और सेशेल्स के संबंध केवल आधिकारिक कूटनीतिक इतिहास तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसकी जड़ें बहुत पुरानी हैं। उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक रूप से दोनों देशों के बीच मानव संपर्क और सांस्कृतिक संबंध सदियों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर दोनों देशों को अलग नहीं करता, बल्कि उन्हें आपस में जोड़ने का कार्य करता है। यह साझा भूगोल सहयोग और विश्वास का आधार है।
समुद्री सुरक्षा और ब्लू इकॉनमी पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि सेशेल्स अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण एक महत्वपूर्ण समुद्री राष्ट्र है। भारत और सेशेल्स दोनों ही समुद्री सुरक्षा, स्थिरता और ब्लू इकॉनमी को साझा विकास का आधार मानते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दोनों देशों के बीच रक्षा और समुद्री सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है, जिसमें भारतीय नौसेना की ऐतिहासिक भूमिका भी शामिल रही है।
SESEL विजन से मजबूत होगा सहयोग
प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल ही में अपनाए गए SESEL (Sustainability, Economic Growth and Security through Enhanced Linkages) विजन ने भारत और सेशेल्स के बीच भविष्य की साझेदारी के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है। उन्होंने कहा कि इस ढांचे के तहत व्यापार, निवेश, उद्योग और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गति मिलेगी, जिससे दोनों देशों के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे।
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