Last updated: July 25th, 2026 at 11:50 am

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्र सरकार पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटनाक्रम को देश के युवाओं की एक बड़ी लोकतांत्रिक जीत बताते हुए कहा कि जनता की आवाज़ को लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता।
प्रियंका गांधी ने कहा कि यह फैसला उन लाखों छात्रों और युवाओं के संघर्ष का परिणाम है, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लगातार उठाया। उनके अनुसार, लोकतंत्र में जनता की इच्छा सर्वोपरि होती है और सरकारों को नागरिकों की आवाज़ सुननी ही पड़ती है।
उन्होंने छात्रों के आंदोलन की सराहना करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद युवाओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। उनका मानना है कि यह पूरे देश के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है कि लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए भी बदलाव लाया जा सकता है।
प्रियंका गांधी ने अपने बयान में कहा कि देश के युवाओं ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी सबसे बड़ी ताकत होती है। उन्होंने इसे केवल एक राजनीतिक घटनाक्रम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती के रूप में देखा।
पीएम आवास के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन
इससे पहले परीक्षा विवाद और छात्रों के समर्थन में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेता इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे।
करीब तीन घंटे तक चले इस प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं ने छात्रों के समर्थन में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। बाद में पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रदर्शन समाप्त कराया और कई नेताओं को हिरासत में लिया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक बयानबाजी लगातार तेज हो गई है। पक्ष और विपक्ष दोनों इस घटनाक्रम को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं, जबकि शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग अब भी चर्चा के केंद्र में बनी हुई है।
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