Last updated: September 3rd, 2026 at 08:20 am

चंडीगढ़: पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची में अपना नाम ‘शिफ्टेड’ यानी स्थानांतरित दर्ज किए जाने को लेकर भाजपा में शामिल हो चुके राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे सामान्य प्रशासनिक या क्लेरिकल गलती मानने से इनकार करते हुए राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया है।
चड्ढा के मुताबिक, वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं और उनका मतदाता पहचान पत्र मोहाली में पंजीकृत है। इसके बावजूद ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनके नाम के सामने ‘शिफ्टेड’ दर्ज किया गया है।
अंतिम सूची से पहले सुधार का मौका
राघव चड्ढा ने कहा कि फिलहाल यह ड्राफ्ट मतदाता सूची है और अंतिम सूची अभी जारी नहीं हुई है। मतदाताओं को दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के जरिए नाम और विवरण में सुधार कराने का अवसर दिया जा रहा है। उनके अनुसार, अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित होनी है।
हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि उनका नाम ‘शिफ्टेड’ दर्ज होना केवल एक सामान्य गलती कैसे माना जा सकता है। उन्होंने इसे राजनीतिक बदले से जोड़ते हुए जांच की मांग की है।
चुनावी प्रक्रिया में अधिकारियों की भूमिका पर उठाए सवाल
चड्ढा ने सवाल किया कि उनके नाम को स्थानांतरित के रूप में किस स्तर पर दर्ज किया गया और इसके सत्यापन की प्रक्रिया किस तरह हुई। उन्होंने बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (AERO), निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) और जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) तक की भूमिका का जिक्र किया।
उनका आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया में तैनात अधिकारियों पर राज्य सरकार का प्रशासनिक प्रभाव रहता है और इसी माध्यम से कथित तौर पर राजनीतिक दबाव बनाया जा सकता है।
AAP छोड़ने के बाद निशाना बनाने का आरोप
राघव चड्ढा ने दावा किया कि आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद पार्टी नेतृत्व उनसे नाराज है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके जैसे नेताओं के खिलाफ पंजाब पुलिस और सरकारी प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है।
चड्ढा ने यह भी दावा किया कि AAP छोड़कर भाजपा में शामिल हुए कुछ अन्य सांसदों को भी कथित तौर पर निशाना बनाया गया है। उनके मुताबिक, ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनके नाम के साथ हुआ बदलाव इसी सिलसिले की एक और कड़ी है।
SIR गाइडलाइन का भी दिया हवाला
राघव चड्ढा ने अपने आरोपों के समर्थन में भारत निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से संबंधित दिशानिर्देशों का हवाला दिया। उन्होंने गाइडलाइन के पैराग्राफ 4(d) का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनावी डेटाबेस में पहले से चिन्हित जनप्रतिनिधियों के लिए ‘प्रोटेक्टेड लिस्ट’ का प्रावधान है।
उनके अनुसार, इसमें सांसदों और विधायकों के अलावा न्यायपालिका, कला-संस्कृति, पत्रकारिता, खेल और सार्वजनिक सेवा से जुड़ी प्रमुख हस्तियों के नाम शामिल किए जा सकते हैं।
‘निर्देश का जानबूझकर उल्लंघन’ करने का आरोप
चड्ढा का कहना है कि वह पंजाब से मौजूदा राज्यसभा सांसद हैं, इसलिए उनके मामले में SIR की संबंधित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके नाम को ‘शिफ्टेड’ दर्ज करना केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया कदम है।
फिलहाल मामला ड्राफ्ट मतदाता सूची से जुड़ा है और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद अंतिम सूची में क्या बदलाव होता है, इस पर नजर बनी हुई है।
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