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शराबबंदी के सवाल पर सियासी घमासान, रोहिणी आचार्य ने डिप्टी सीएम बिजेंद्र यादव पर साधा निशाना

बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के एक बयान ने सियासी
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बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के एक बयान ने सियासी विवाद को हवा दे दी है। शराबबंदी खत्म करने की मांग से जुड़े सवाल पर उनके जवाब के बाद राजद नेता और लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया के जरिए उन पर तीखा हमला बोला।

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    मीडिया के सवाल पर बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कथित तौर पर कहा था कि अगर शराबबंदी हटाने की बात हो रही है तो फिर सभी कानून ही हटा देने चाहिए और लोगों को जो मन करे, वह करने देना चाहिए। उनके इसी बयान को लेकर रोहिणी आचार्य ने सवाल उठाए।

    रोहिणी आचार्य का तीखा पलटवार

    रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पोस्ट में उपमुख्यमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उनकी तुलना बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के सामने उठाए जा रहे गंभीर नीतिगत सवालों का जवाब देने के बजाय सत्ता पक्ष के नेता मुद्दे से भटकाने वाली टिप्पणियां कर रहे हैं।

    उन्होंने बिहार की आर्थिक स्थिति, बजट संतुलन और वित्तीय प्रबंधन जैसे विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब और रोडमैप देना चाहिए।

    लालू प्रसाद को लेकर टिप्पणी पर भी जताई नाराजगी

    रोहिणी आचार्य ने अपने बयान में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि नीतिगत सवालों का जवाब देने के बजाय लालू प्रसाद पर टिप्पणी करना राजनीतिक जवाबदेही से बचने का तरीका है।

    उन्होंने दावा किया कि सरकार के पास राज्य की मौजूदा आर्थिक चुनौतियों से निपटने को लेकर स्पष्ट योजना नहीं है। हालांकि, ये आरोप रोहिणी आचार्य की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं।

    शराबबंदी पर फिर तेज हुई बहस

    बिहार में शराबबंदी लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रही है। समय-समय पर विपक्ष की ओर से इस कानून की समीक्षा या इसे समाप्त करने की मांग उठती रही है। इसी बीच उपमुख्यमंत्री के बयान और उस पर रोहिणी आचार्य की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर शराबबंदी को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है।

    अब इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आगे होने वाली बयानबाजी पर नजर रहेगी। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकार शराबबंदी कानून को लेकर अपनी मौजूदा नीति पर क्या स्पष्ट रुख रखती है।

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