Last updated: June 21st, 2026 at 06:24 am

बिहार के सहरसा जिले में मंत्री रत्नेश सादा और एडीएम निशांत कुमार पर लगाए गए आरोपों को लेकर जारी राजनीतिक विवाद अब थमता नजर आ रहा है। आधिकारिक जांच में इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन पाया गया है। इसके बाद एनडीए नेताओं ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है।
स्थानीय परिसदन में आयोजित एक संयुक्त प्रेसवार्ता में एनडीए के वरिष्ठ नेताओं ने साफ किया कि मंत्री और प्रशासनिक अधिकारी दोनों पर लगाए गए आरोपों की जांच पहले ही पूरी हो चुकी है, जिसमें कोई भी ठोस सबूत सामने नहीं आया है।
जदयू जिलाध्यक्ष गूंजेश्वर साह ने कहा कि इन आरोपों का उद्देश्य केवल सरकार और प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचाना और विकास कार्यों से ध्यान भटकाना था। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट में सभी आरोप गलत साबित हुए हैं।
पूर्व विधायक डॉ. आलोक रंजन ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पूरी तरह राजनीतिक द्वेष से प्रेरित कार्रवाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।
एनडीए नेताओं ने इसे एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि कुछ लोग निजी हितों के लिए संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की राजनीति को जनता के सामने उजागर किया जाएगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सहरसा की राजनीतिक स्थिति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। एनडीए की ओर से जहां अपने नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों का बचाव किया जा रहा है, वहीं विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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