Last updated: September 11th, 2026 at 10:05 am

नई दिल्ली: BRICS Summit 2026 के बीच कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने भारत की भूमिका को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि BRICS को सिर्फ आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक चुनौतियों पर भी देशों के बीच सहमति बनाने के लिए इस मंच का इस्तेमाल किया जा सकता है।
खुर्शीद के मुताबिक भारत को BRICS की अध्यक्षता के दौरान ऐसी पहल करनी चाहिए, जिससे अलग-अलग देशों को साझा मुद्दों पर एक साथ लाया जा सके। उन्होंने आतंकवाद को वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि इसके खिलाफ सभी देशों को मिलकर काम करने की जरूरत है। इसी तरह जलवायु परिवर्तन का असर भी पूरी दुनिया पर पड़ता है, इसलिए इस मुद्दे पर भी व्यापक सहमति जरूरी है।
डी-डॉलराइजेशन पर क्या बोले?
BRICS में डॉलर पर निर्भरता कम करने की चर्चाओं पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि कुछ देश आपसी व्यापार में अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में लेनदेन बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, उनके अनुसार इसे पूरी तरह डी-डॉलराइजेशन तभी कहा जाएगा, जब कोई नई साझा मुद्रा या व्यापक रूप से स्वीकार्य वैकल्पिक व्यवस्था सामने आए।
उन्होंने कहा कि फिलहाल BRICS देशों के बीच किसी एक नई मुद्रा को लेकर आम सहमति नहीं है। भविष्य में डॉलर आधारित व्यापार के लिए भी कोई नई व्यवस्था विकसित हो सकती है और अमेरिका इन बदलावों पर नजर रखेगा।
ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के बीच पुल बने BRICS
खुर्शीद ने BRICS को ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के बीच संवाद का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि संगठन से दुनिया की बड़ी आबादी जुड़ी है और तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के कारण वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में इसकी भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण हो सकती है।
उनका मानना है कि विकसित और विकासशील देशों के बीच संवाद बढ़ाने में BRICS अहम भूमिका निभा सकता है।
भारत की अध्यक्षता से विपक्ष को उम्मीद
सलमान खुर्शीद ने कहा कि BRICS की अध्यक्षता भारत के पास होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की भूमिका पर विशेष ध्यान है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत अलग-अलग देशों के बीच सहमति बनाने और सहयोग बढ़ाने की दिशा में प्रभावी पहल करेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष चाहता है कि सरकार BRICS से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों और तैयारियों पर विपक्ष से भी सलाह-मशविरा करे। हालांकि, उन्होंने माना कि सरकार की मौजूदा नीति में ऐसी परंपरा देखने को नहीं मिलती।
BRICS के अंदर मतभेद भी चुनौती
खुर्शीद ने BRICS के सामने मौजूद चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि संगठन के सभी सदस्य देशों की हर मुद्दे पर एक जैसी राय नहीं है। कई देशों के बीच आपसी मतभेद और विवाद भी हैं। उन्होंने ईरान और UAE का उदाहरण देते हुए कहा कि इन मतभेदों के बावजूद बातचीत और सहयोग का रास्ता तलाशना जरूरी है।
उनके मुताबिक अगर BRICS देशों के बीच मौजूद मतभेदों को कम करने और साझा मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश होती है, तो इसका फायदा सिर्फ सदस्य देशों को ही नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक समुदाय को भी मिल सकता है।
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