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‘सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं’, सम्राट चौधरी का विपक्ष पर हमला, बोले आदेश मिलते ही छोड़ दूंगा बंगला

बिहार की राजनीति में सरकारी आवास को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। विधान परिषद
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बिहार की राजनीति में सरकारी आवास को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। विधान परिषद में विपक्ष की नेता राबड़ी देवी को नया सरकारी आवास आवंटित किए जाने के बावजूद 10 सर्कूलर रोड स्थित आवास खाली न करने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।

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    इसी बीच शेखपुरा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिना नाम लिए विपक्ष पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं होता और इसे लेकर अनावश्यक भावनात्मक लगाव रखना गलत है।

    मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि वे पिछले कई वर्षों से विभिन्न पदों पर रहे हैं, लेकिन कभी भी सरकारी आवास को स्थायी रूप से अपनाने की मानसिकता नहीं रखी। उन्होंने बताया कि उन्होंने हमेशा सीमित संसाधनों में रहकर ही प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है।

    सीएम ने कहा कि लोकसेवक का आवास जनता की सेवा के लिए होता है, न कि व्यक्तिगत अधिकार के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में कोई भी पद स्थायी नहीं होता और सभी को नियमों के अनुसार आवास परिवर्तन करना चाहिए।

    उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद संभाला, तब भी उन्होंने आवास को ‘लोकसेवक का घर’ बताते हुए उसे जनता की सेवा का केंद्र मानने की बात कही थी। उनके अनुसार, सरकारी आवास को लेकर किसी प्रकार का मोह या व्यक्तिगत दावा उचित नहीं है।

    सम्राट चौधरी ने आगे कहा कि वे 1999 से अब तक कई सरकारी पदों पर रह चुके हैं और विभिन्न आवासों में रहे हैं, लेकिन कभी भी किसी एक स्थान को निजी संपत्ति की तरह नहीं माना। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके लिए पद और सुविधाएं सेवा का माध्यम हैं, न कि व्यक्तिगत लाभ का साधन।

    उन्होंने विपक्ष पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों को सरकारी आवास से अत्यधिक लगाव हो जाता है, जबकि लोकतंत्र में यह व्यवस्था सेवा के लिए होती है। परिवार और व्यक्तिगत हितों को लेकर भी उन्होंने टिप्पणी की और कहा कि जनता के हित सबसे ऊपर होने चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि वे पूरी तरह पार्टी नेतृत्व और संगठन के निर्णय के अनुसार काम करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस दिन पार्टी या नेता उन्हें पद छोड़ने के लिए कहेंगे, वे 24 घंटे के भीतर सरकारी आवास खाली कर अपने निजी निवास पर लौट जाएंगे।

    उन्होंने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य जनता की भलाई है और सभी निर्णय इसी भावना के साथ लिए जाते रहेंगे।

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