Last updated: July 20th, 2026 at 08:50 am

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन और जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच महात्मा गांधी के पोते एवं इतिहासकार राजमोहन गांधी ने उपवास की परंपरा और उसके उद्देश्य पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने उपवास का इस्तेमाल केवल सरकारों पर दबाव बनाने के लिए नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और लोगों की सोच बदलने के लिए भी किया था।
पीटीआई से बातचीत में राजमोहन गांधी ने बताया कि भूख हड़ताल का इतिहास भारत से पहले आयरलैंड के ब्रिटिश शासन विरोधी आंदोलन से जुड़ा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भगत सिंह और जतिन दास ने भी लंबे समय तक भूख हड़ताल कर विरोध दर्ज कराया था। वहीं महात्मा गांधी ने अपना पहला उपवास दक्षिण अफ्रीका में किया था और बाद में कई अवसरों पर अलग-अलग मुद्दों को लेकर अनशन किया।
राजमोहन गांधी के अनुसार, महात्मा गांधी के कई उपवास ब्रिटिश शासन के विरोध में थे, लेकिन उन्होंने अनेक बार सामाजिक सद्भाव और लोगों के मन में परिवर्तन लाने के उद्देश्य से भी अनशन किया। विशेष रूप से हिंदू-मुस्लिम एकता को मजबूत करने के लिए उन्होंने उपवास का सहारा लिया था।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार आंदोलनकारियों से संवाद स्थापित करे और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे, तो उपवास समाप्त होने का रास्ता निकल सकता है।
गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर 6 जून से प्रदर्शन जारी है। इसी क्रम में सोनम वांगचुक ने 21 दिनों का अनशन शुरू किया था। शनिवार को दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। वहीं रविवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें किसी अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।
![]()
Comments are off for this post.