Last updated: August 26th, 2026 at 06:44 am

त्योहारी सीजन करीब आते ही चीनी की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिली है। मंगलवार, 25 अगस्त को देशभर के खुदरा बाजार में चीनी का औसत भाव बढ़कर करीब 64 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया। इससे एक दिन पहले यह कीमत 63.05 रुपये प्रति किलो थी। लगातार बढ़ रहे दामों ने घरेलू बजट पर दबाव बढ़ा दिया है।
एक महीने में 31 फीसदी तक बढ़ी कीमत
उपभोक्ता मामलों के विभाग के मूल्य निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, 25 अगस्त को चीनी का अखिल भारतीय औसत खुदरा भाव 63.97 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। एक महीने पहले यानी जुलाई में इसका औसत भाव 48.81 रुपये प्रति किलो था। इस हिसाब से एक महीने में कीमत करीब 31 फीसदी बढ़ चुकी है।
वहीं, पिछले साल अगस्त की तुलना करें तो भी चीनी काफी महंगी हुई है। उस समय औसत कीमत करीब 46.31 रुपये प्रति किलो थी। यानी सालाना आधार पर भी कीमत में लगभग 38 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
थोक बाजार में भी कीमत ऊंची, लेकिन मिल भाव में नरमी
आंकड़ों के अनुसार, 25 अगस्त को चीनी का औसत थोक भाव 59.23 रुपये प्रति किलो रहा। एक महीने पहले यह 45.35 रुपये और एक साल पहले 43.01 रुपये प्रति किलो था।
हालांकि, चीनी के मिल भाव में हाल के दिनों में कुछ राहत दिखाई दे रही है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा के अनुसार, सरकार की ओर से चीनी आयात की अनुमति और जमाखोरी व सट्टेबाजी पर नियंत्रण के कदमों के बाद मिल स्तर पर कीमत करीब 18 फीसदी घटकर 55 रुपये प्रति किलो रह गई है। पिछले सप्ताह यही भाव लगभग 67 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था।
सरकार ने 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात को दी मंजूरी
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम करना है।
इसके अलावा चीनी की जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू की गई है। डीलरों के लिए अधिकतम 400 टन तक चीनी रखने की सीमा तय की गई है। वहीं, 1 सितंबर से बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं, जैसे बेकरी और मिठाई कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों को 15 दिनों की जरूरत से अधिक स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी।
जमाखोरी पर सरकार की नजर
चीनी की कीमतों में असामान्य बढ़ोतरी को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की टीमें चीनी मिलों में उपलब्ध स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी कर रही हैं। इसका मकसद यह पता लगाना है कि कहीं बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने या जमाखोरी के जरिए कीमतें बढ़ाने की कोशिश तो नहीं हो रही।
फिलहाल मिल स्तर पर कीमतों में नरमी के बावजूद खुदरा बाजार में इसका पूरा फायदा उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है। ऐसे में आने वाले दिनों में चीनी के दाम किस दिशा में जाते हैं, इस पर सरकार के आयात फैसले, उपलब्ध स्टॉक और त्योहारी मांग का असर महत्वपूर्ण रहेगा।
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