Last updated: August 6th, 2026 at 07:54 am

नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम बापू को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत की मांग को अस्वीकार कर दिया। अदालत ने यह फैसला जोधपुर एम्स की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सुनाया, जिसमें उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी की सलाह तो दी गई है, लेकिन अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं बताई गई।
स्वास्थ्य के आधार पर मांगी थी जमानत
85 वर्षीय आसाराम ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में अंतरिम जमानत देना आवश्यक नहीं है।
हालत बिगड़ने पर दोबारा कर सकते हैं आवेदन
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को पूरी तरह समाप्त नहीं किया है। अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में स्वास्थ्य की स्थिति गंभीर होती है, तो आसाराम दोबारा अंतरिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
फिलहाल पैरोल पर हैं आसाराम
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि आसाराम को फिलहाल राजस्थान हाई कोर्ट से 20 दिनों की पैरोल मिली हुई है। इसी तथ्य को भी अदालत ने अपने विचार में शामिल किया।
एम्स की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
जोधपुर एम्स की मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रखने की आवश्यकता है, लेकिन उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है। इसी रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से इनकार किया।
मामले की पृष्ठभूमि
आसाराम ने वर्ष 2013 के नाबालिग दुष्कर्म मामले में दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। साथ ही उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर अंतरिम जमानत की भी मांग की थी। इससे पहले 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने एम्स, जोधपुर को उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
हाई कोर्ट ने बरकरार रखी थी सजा
राजस्थान हाई कोर्ट ने इस वर्ष मई में अपने फैसले में आसाराम को कुछ आरोपों से राहत दी थी, लेकिन दुष्कर्म के आरोप में दोष सिद्ध होने के पर्याप्त साक्ष्य मिलने के आधार पर उनकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।
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