Last updated: July 28th, 2026 at 10:17 am
देशभर में छात्रों के हालिया प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ फिलहाल कोई नई गिरफ्तारी नहीं करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन प्रदर्शनकारियों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और जिन्हें हिरासत में लिया गया है, उन्हें रिहा किया जाए।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने संकेत दिया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जा सकती है। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश को सौंपे जाने पर भी विचार किया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, बिहार, असम, केरल और उत्तर प्रदेश सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। साथ ही इन राज्यों के मुख्य सचिवों को अगली सुनवाई में वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान कुछ आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी भीड़ में शामिल हो गए थे, जिनकी पहचान की जा चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित राज्यों को निर्देश दिया कि मामले से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग, वायरलेस संचार रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने यह भी कहा कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों और अन्य लोगों की व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक न की जाए।
अदालत ने राज्यों की पुलिस को दर्ज एफआईआर की जांच जारी रखने की अनुमति दी है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ गिरफ्तारी या अन्य दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इसके अलावा बिहार में नाबालिग प्रदर्शनकारियों को हिरासत में रखने के आरोपों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अदालत ने निर्देश दिया कि यदि किसी नाबालिग को हिरासत में रखा गया है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।
अब इस मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जहां अदालत अंतरिम आदेशों के पालन और आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।
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