Last updated: May 27th, 2026 at 06:35 am

सुप्रिम कोर्ट ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बड़ा फैसला सुनाते हुए चुनाव आयोग को राहत दी है। अदालत ने साफ कहा कि चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई यह प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी दायरे में है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि केवल इस आधार पर SIR प्रक्रिया को अवैध नहीं माना जा सकता कि यह सामान्य मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया से अलग है। कोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग को मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने और आवश्यक पुनरीक्षण करने का अधिकार प्राप्त है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने दस्तावेजों और प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि आयोग द्वारा मांगे गए दस्तावेज मनमाने नहीं हैं और प्रक्रिया के दौरान कानूनी प्रावधानों का पालन किया गया है। साथ ही अदालत ने आधार कार्ड सहित अन्य मान्य दस्तावेजों को लेकर भी स्पष्टता दी।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति की पात्रता को लेकर संदेह होता है, तो चुनाव आयोग संबंधित मामले को तय नियमों के अनुसार सक्षम प्राधिकारी के पास भेज सकता है। अदालत ने माना कि आयोग ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल नहीं किया है।
गौरतलब है कि इस मामले में कई याचिकाएं दायर कर यह सवाल उठाया गया था कि क्या चुनाव आयोग इतने बड़े स्तर पर विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया चला सकता है। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सार्वजनिक किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनाव आयोग के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। वहीं बिहार में आगामी चुनावी तैयारियों के बीच इस निर्णय के राजनीतिक और प्रशासनिक असर पर भी चर्चा तेज हो गई है।
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