Last updated: May 9th, 2026 at 08:46 am

तमिलनाडु की राजनीति इस समय बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, लेकिन अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इसके बावजूद सरकार गठन की राह आसान नहीं दिख रही है और राज्य में लगातार राजनीतिक जोड़तोड़ का दौर जारी है।
चुनाव परिणाम आने के बाद से ही चेन्नई से लेकर पुडुचेरी तक सियासी हलचल तेज हो गई। विभिन्न दलों के नेताओं के बीच लगातार बैठकें और संपर्क अभियान चल रहे हैं। खबरें हैं कि कई विधायकों को रिसॉर्ट में ठहराया गया है ताकि टूट-फूट की संभावना को रोका जा सके। इसी वजह से तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” चर्चा का बड़ा विषय बन गई है।
टीवीके को सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा जुटाना अभी भी चुनौती बना हुआ है। विजय की पार्टी लगातार दूसरे दलों और निर्दलीय विधायकों से समर्थन जुटाने में लगी हुई है। वहीं दूसरी तरफ डीएमके और एआईएडीएमके भी अपने-अपने स्तर पर रणनीति तैयार कर रहे हैं ताकि सत्ता की तस्वीर अपने पक्ष में की जा सके।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कई बड़े नेता पर्दे के पीछे सक्रिय हैं और सरकार गठन को लेकर लगातार समीकरण बदले जा रहे हैं। वाम दलों और कुछ क्षेत्रीय पार्टियों के रुख ने भी तमिलनाडु की राजनीति को और रोमांचक बना दिया है।
उधर एआईएडीएमके नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि पार्टी बिना शर्त किसी को समर्थन नहीं देगी। वहीं डीएमके भी विपक्ष की भूमिका और संभावित राजनीतिक विकल्पों पर लगातार मंथन कर रही है। इन सबके बीच विजय की अगली रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
तमिलनाडु में फिलहाल सत्ता की लड़ाई पूरी तरह खुली हुई है और आने वाले कुछ दिन राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
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