Last updated: July 27th, 2026 at 09:35 am

बिहार के पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव की गिरफ्तारी के बाद उनके वकीलों ने अदालत में जमानत याचिका दायर की है। गांधी मैदान थाना से जुड़े मामले में एसडीजेएम कोर्ट में दाखिल बेल पिटीशन में बचाव पक्ष ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को आधार बनाते हुए राहत की मांग की है।
बचाव पक्ष की अधिवक्ता निशा सिंह ने बताया कि तेज प्रताप यादव डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें जेल में रखने के बजाय चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता है।
अधिवक्ता ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए दावा किया कि गिरफ्तारी के समय तेज प्रताप यादव के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में लिया गया, जो नियमों के विपरीत है। हालांकि, इस दावे पर पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
बचाव पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि गिरफ्तारी का समय जानबूझकर इस तरह चुना गया ताकि अवकाश के कारण तत्काल न्यायिक राहत मिलना मुश्किल हो सके। इसके साथ ही यह भी कहा गया कि हिरासत में लेने के बाद उन्हें अलग-अलग थानों में ले जाया गया, जिससे कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं।
मामले में लगाई गई दंगा भड़काने और शांति भंग करने जैसी धाराओं पर भी अधिवक्ता ने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि घटना के दौरान तेज प्रताप यादव केवल मौके पर पहुंचे थे, जहां उन्होंने छात्रों के आग्रह पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया और बिना किसी भड़काऊ भाषण या विवाद के वहां से लौट गए। बचाव पक्ष का दावा है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यों से मेल नहीं खाते।
वकीलों ने अदालत से अपील की है कि तेज प्रताप यादव की स्वास्थ्य स्थिति और कथित कानूनी अनियमितताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें जमानत प्रदान की जाए। अब इस मामले में अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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