Last updated: October 5th, 2026 at 12:42 pm

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सियासी घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। अब राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि 8 अक्टूबर को पटना में महागठबंधन के सभी दल मिलकर लोकभवन तक मार्च करेंगे।
तेजस्वी यादव ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में SIR प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग पर कई गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं और चुनाव आयोग की ओर से SIR को कानून और संवैधानिक प्रावधानों के तहत संचालित प्रक्रिया बताया गया है।
7 से 8 अक्टूबर तक विपक्ष का बड़ा अभियान
तेजस्वी यादव के मुताबिक, विपक्ष ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के नेता और कार्यकर्ता प्रखंड स्तर पर आक्रोश मार्च निकालेंगे। इसके अगले दिन यानी 8 अक्टूबर को महागठबंधन के सहयोगी दल जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
पटना में 8 अक्टूबर को वरिष्ठ विपक्षी नेता सड़क पर उतरेंगे। तेजस्वी के अनुसार, यह मार्च विधानसभा के सामने सप्तमूर्ति के पास से शुरू होकर लोकभवन तक जाएगा। इससे पहले भी बिहार में SIR और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ विपक्षी दल प्रदर्शन कर चुके हैं।
‘बिहार से ही SIR की शुरुआत हुई’
प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने कहा कि SIR की शुरुआत बिहार से हुई थी और उनकी पार्टी ने शुरुआत से ही इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में मतदाता सूची को लेकर गड़बड़ी हुई और विपक्ष जिन बातों को पहले से उठा रहा था, वे अब सामने आ रही हैं।
तेजस्वी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम करने का आरोप भी लगाया। इससे पहले भी वह चुनाव प्रक्रिया और SIR को लेकर ज्ञानेश कुमार पर ऐसे आरोप लगा चुके हैं।
बिहार-बंगाल चुनाव को लेकर भी उठाए सवाल
तेजस्वी यादव ने बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों राज्यों में चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की आपत्तियां रही हैं। उन्होंने बिहार में चुनाव से पहले महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे जाने का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि निर्वाचन आयोग ने उस समय क्या कार्रवाई की।
उन्होंने कहा कि बिहार लोकतंत्र की जननी है और उनकी पार्टी लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी। तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि SIR के जरिए मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हुए हैं। ये सभी दावे तेजस्वी यादव और विपक्ष की ओर से लगाए गए हैं।
दिल्ली के बाद पटना में भी बढ़ेगा दबाव
SIR और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों का आंदोलन अब बिहार तक सीमित नहीं है। इंडिया गठबंधन के दल देशभर में विरोध कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं। 2 से 8 अक्टूबर तक विरोध अभियान चलाने की विपक्षी रणनीति पहले ही सामने आ चुकी है।
ऐसे में 8 अक्टूबर का पटना लोकभवन मार्च बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन सकता है। एक तरफ विपक्ष SIR को लेकर निर्वाचन आयोग पर लगातार दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष इस प्रक्रिया का बचाव कर रहे हैं। अब देखना होगा कि पटना में प्रस्तावित मार्च के बाद यह राजनीतिक टकराव किस दिशा में जाता है।
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