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बंगाल चुनाव से पहले TMC का आक्रामक रुख: संसद से लेकर चुनाव आयोग तक उठाए बड़े मुद्दे

 पश्चिम बंगाल:  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) पूरी तरह चुनावी मोड में नजर आ रही है।
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 पश्चिम बंगाल:  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) पूरी तरह चुनावी मोड में नजर आ रही है। संसद के विशेष सत्र से लेकर राज्य की राजनीति तक, पार्टी लगातार अपने मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठा रही है।

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     संसद में TMC का फोकस बदला

    लोकसभा में नारी शक्ति वंदन विधेयक पर चर्चा के दौरान TMC सांसद काकोली घोष ने बिल से ज्यादा चुनावी मुद्दों को प्राथमिकता दी। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मतदाता सूची में नाम हटाने और अधिकारियों के तबादलों को लेकर चिंता जताई।

    हालांकि उन्होंने विधेयक का समर्थन किया, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

    चुनाव से पहले रणनीतिक बयानबाजी

    काकोली घोष का यह रुख साफ तौर पर आगामी बंगाल चुनाव को ध्यान में रखकर देखा जा रहा है। उन्होंने अपने संबोधन में बांग्ला भाषा का इस्तेमाल कर सीधे राज्य के मतदाताओं को संदेश देने की कोशिश की।

    हुमायूं कबीर के खिलाफ आयोग में शिकायत

    वहीं, मुर्शिदाबाद में राजनीतिक विवाद भी गहराता जा रहा है। TMC ने आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के उम्मीदवार हुमायूं कबीर के खिलाफ राज्य चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।

    पार्टी ने आरोप लगाया है कि हुमायूं कबीर ने TMC नेता मोइनुल हक राणा के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और धमकी दी।

    आचार संहिता उल्लंघन का आरोप

    TMC ने आयोग को दिए पत्र में दावा किया है कि एक वीडियो में हुमायूं कबीर द्वारा सांसद अभिषेक बनर्जी और उनके सहयोगियों के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं। पार्टी का कहना है कि यह आचार संहिता का उल्लंघन है और इस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    राजनीतिक तापमान चरम पर

    बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को मतदान प्रस्तावित है, ऐसे में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं। TMC की यह रणनीति चुनावी माहौल को और गर्माने वाली मानी जा रही है।

     

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