Last updated: May 21st, 2026 at 03:51 am

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी के कुछ नेताओं द्वारा संगठनात्मक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जाने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने तीन नाराज़ विधायकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की।
करीब 40 मिनट तक चली इस बैठक में कुणाल घोष, संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी शामिल हुए। बताया जा रहा है कि बैठक में नेताओं ने संगठन में पारदर्शिता, जवाबदेही और नेतृत्व में बदलाव जैसे मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं खुलकर रखीं।
दरअसल, विधायक दल की हालिया बैठक के दौरान इन नेताओं ने पार्टी के अंदर संवाद की कमी और कुछ संगठनों में लंबे समय से एक ही नेतृत्व बने रहने पर नाराज़गी जताई थी। इसके तुरंत बाद पार्टी नेतृत्व ने उन्हें चर्चा के लिए बुलाया।
सूत्रों के मुताबिक, संदीपन साहा ने उत्तर कोलकाता संगठन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। वहीं कुणाल घोष ने छात्र और युवा संगठनों की सक्रियता और नेतृत्व को लेकर असंतोष जाहिर किया। उन्होंने कहा कि संगठन में समय-समय पर बदलाव जरूरी है।
दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी ने उलुबेरिया इलाके में कथित भ्रष्टाचार और चुनाव के दौरान अंदरूनी विरोध की शिकायत उठाई। उन्होंने साफ कहा कि स्थानीय स्तर पर हुई किसी भी गड़बड़ी की जिम्मेदारी वह व्यक्तिगत तौर पर नहीं लेंगे।
बैठक के दौरान नेताओं ने यह भी संकेत दिया कि यदि संगठनात्मक स्तर पर सुधार नहीं हुआ तो वे अपनी बात सार्वजनिक मंचों पर भी रख सकते हैं।
हालांकि, पार्टी नेतृत्व ने सभी शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित नेताओं से अपने आरोप और सुझाव लिखित रूप में देने को कहा है। तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक ढंग से अपनी बात रखने की पूरी आजादी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले पार्टी के भीतर उभर रहे मतभेद तृणमूल नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन सकते हैं।
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