Last updated: May 21st, 2026 at 04:57 am
Yogi Adityanath, chief minister of Uttar Pradesh, speaks during a news conference in Lucknow, India, on Friday, March 19, 2021. The ruling Bharatiya Janata Party faces a slew of provincial elections this year and next, including in key Uttar Pradesh state, which sends the largest number of lawmakers to the parliament. Photographer: T. Narayan/Bloomberg via Getty Imagesउत्तर प्रदेश सरकार ने आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण तय करने के लिए राज्य सरकार ने एक विशेष आयोग का गठन किया है। इस आयोग की जिम्मेदारी पंचायत स्तर पर पिछड़े वर्गों की स्थिति का अध्ययन कर आरक्षण को लेकर सिफारिश देना होगी।
सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश राम औतार सिंह को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनके साथ चार अन्य सदस्यों को भी आयोग में शामिल किया गया है। आयोग का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से छह महीने तक रहेगा।
आयोग पंचायतों में पिछड़े वर्ग की सामाजिक और राजनीतिक भागीदारी का अध्ययन करेगा। इसके बाद तैयार रिपोर्ट के आधार पर पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण का स्वरूप और प्रतिशत तय किया जाएगा।
आयोग में सेवानिवृत्त न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। इनमें पूर्व अपर जिला न्यायाधीश बृजेश कुमार और संतोष कुमार विश्वकर्मा के साथ रिटायर्ड आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह शामिल हैं।
गौरतलब है कि राम औतार सिंह इससे पहले वर्ष 2023 में नगर निकाय चुनावों के दौरान गठित पिछड़ा वर्ग आयोग की भी अगुवाई कर चुके हैं। उस समय आयोग की रिपोर्ट के आधार पर निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू किया गया था। अब पंचायत चुनावों के लिए एक बार फिर उन्हें यह अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय किए गए “ट्रिपल टेस्ट” नियम के तहत स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने से पहले समर्पित आयोग का गठन जरूरी होता है। यही आयोग पिछड़े वर्गों की वास्तविक स्थिति का आंकलन कर सरकार को अपनी रिपोर्ट देता है।
प्रदेश सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि आयोग से जुड़े मानदेय, भत्ते और अन्य सुविधाओं को लेकर अलग से आदेश जारी किए जाएंगे। पंचायत चुनावों को लेकर आयोग के गठन को सरकार की बड़ी प्रशासनिक तैयारी माना जा रहा है।
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