Last updated: September 16th, 2026 at 11:37 am

समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बिहार की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले NDA शासित राज्यों में UCC लागू करने के लक्ष्य वाले बयान के बाद बिहार में भी राजनीतिक हलचल बढ़ी है। खास नजर NDA के सहयोगी दल JDU के रुख पर है।
JDU के प्रदेश महासचिव श्याम रजक ने कहा कि बिहार में UCC लागू नहीं होने दिया जाएगा। इसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि पहले UCC का ड्राफ्ट देखा जाएगा और फिर इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से बातचीत की जाएगी। मंगलवार को नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के बीच दो दौर की बैठक ने इस चर्चा को और बढ़ा दिया।
बैठक के बाद डिप्टी सीएम विजय चौधरी ने कहा कि पार्टी पहले बिल के प्रावधानों का अध्ययन करेगी और उसके बाद आंतरिक विचार-विमर्श के जरिए आगे का फैसला लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अभी बिल देखा ही नहीं गया है और ऐसा बिल होना चाहिए जिसमें JDU की बात शामिल हो।
1. क्या बिहार में UCC लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है?
15 सितंबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बिहार सरकार की ओर से UCC को लेकर कोई आधिकारिक बिल, ड्राफ्ट, विशेषज्ञ समिति या कैबिनेट प्रस्ताव सार्वजनिक नहीं किया गया है। यानी राजनीतिक बहस जरूर तेज है, लेकिन कानून बनाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होने की सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।
UCC को राज्य में लागू करने के लिए विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा। उत्तराखंड में इसके लिए विशेषज्ञ समिति बनाई गई थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर ड्राफ्ट तैयार हुआ, लोगों से सुझाव लिए गए, कैबिनेट की मंजूरी के बाद विधानसभा में बिल पेश किया गया और बाद में राष्ट्रपति की मंजूरी से कानून बना।
2. JDU साथ नहीं आई तो विधानसभा में क्या होगा?
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 122 है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक NDA के पास 202 विधायक हैं। इनमें BJP के 89 और JDU के 85 विधायक शामिल हैं। LJP(R) के 19, HAM के 5 और RLM के 4 विधायक हैं।
अगर JDU के 85 विधायकों को अलग कर दिया जाए तो BJP और बाकी सहयोगी दलों की संख्या 117 रह जाती है, जो बहुमत के आंकड़े से 5 कम है।
विधान परिषद में कुल 75 सदस्य हैं और बहुमत के लिए 38 सदस्यों की जरूरत होती है। NDA के पास 48 MLC बताए गए हैं, जिनमें BJP के 25 और JDU के 20 सदस्य हैं। बाकी सहयोगी दलों के पास एक-एक सदस्य हैं।
3. UCC पर JDU का पुराना रुख क्या रहा है?
UCC को लेकर JDU की सावधानी नई नहीं है। मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश कुमार ने विधि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष बीएस चौहान को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका तर्क था कि विभिन्न धार्मिक समूहों, विशेषकर अल्पसंख्यकों की सहमति के बिना UCC लागू करने से सामाजिक वैमनस्य की स्थिति बन सकती है और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी संवैधानिक गारंटी को लेकर भरोसा प्रभावित हो सकता है।
जुलाई 2016 में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान भी नीतीश कुमार ने कहा था कि जब तक UCC को लेकर देशभर में आम सहमति नहीं बनती, तब तक बिहार में इसे लागू नहीं किया जाएगा।
यही वजह है कि मौजूदा बहस को JDU के पुराने रुख से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
4. NDA के दूसरे सहयोगियों का क्या रुख है?
UCC को लेकर NDA के सभी सहयोगी दलों की स्थिति अभी एक जैसी नहीं है। RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि केंद्र का प्रस्ताव सामने आने के बाद उनकी पार्टी अपना पक्ष रखेगी।
हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष मांझी ने UCC को लेकर सकारात्मक संकेत दिया और कहा कि अमित शाह ने कहा है तो विचार-विमर्श के बाद इसे लागू किया जा सकता है।
वहीं LJP(R) अध्यक्ष चिराग पासवान ने कहा कि भारत का सामाजिक ताना-बाना अलग-अलग है। उन्होंने ड्राफ्ट को सार्वजनिक करने और सभी के हितों को ध्यान में रखने की बात कही। उनका कहना है कि ड्राफ्ट सामने आने के बाद उनकी पार्टी अपना मत रखेगी।
5. नीतीश-ललन की बैठक के बाद सबसे बड़ा सवाल क्या?
अमित शाह के बयान के बाद बिहार में JDU के अलग-अलग नेताओं के बयानों ने UCC को लेकर पार्टी के रुख पर चर्चा बढ़ा दी। श्याम रजक ने विरोध की बात कही, जबकि संजय झा ने पहले ड्राफ्ट देखने और गृह मंत्री से बातचीत की बात कही।
इसके बाद नीतीश कुमार और ललन सिंह के बीच दो दौर की बैठक हुई। बैठक के बाद विजय चौधरी ने स्पष्ट किया कि पहले बिल देखा जाएगा, उसके प्रावधानों का अध्ययन होगा और पार्टी के भीतर चर्चा के बाद फैसला लिया जाएगा।
फिलहाल बिहार में UCC को लेकर अंतिम तस्वीर ड्राफ्ट सामने आने के बाद ही ज्यादा स्पष्ट हो सकती है। तब यह पता चलेगा कि JDU की आपत्तियां किन प्रावधानों को लेकर हैं और पार्टी का अंतिम रुख क्या रहता है। इसी के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि UCC बिहार में सिर्फ कानून बनाने की प्रक्रिया का विषय बनता है या NDA के भीतर सहयोगी दलों के बीच सहमति का मुद्दा भी बनता है।
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