Last updated: September 2nd, 2026 at 02:46 pm

उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को बड़ी सफलता मिली है। STF ने लखनऊ में अलग-अलग गंभीर मामलों में वांछित दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग का कथित सक्रिय सदस्य अनुराग मिश्रा और वर्ष 2024 के RO/ARO भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में लंबे समय से फरार चल रहा पुष्कर पांडेय शामिल है। दोनों की गिरफ्तारी 1 सितंबर की शाम लखनऊ के विभूतिखंड इलाके में आरटीआई भवन के पास पार्श्वनाथ अपार्टमेंट के नजदीक से की गई।
STF के मुताबिक, अनुराग मिश्रा को कपिल सांगवान उर्फ नंदू के आपराधिक नेटवर्क से जुड़े सक्रिय सदस्य के तौर पर चिन्हित किया गया था। उसके खिलाफ दिल्ली में भी गंभीर आपराधिक मामले में कार्रवाई लंबित बताई गई है। पुलिस के अनुसार अनुराग का भाई आकाश मिश्रा दिल्ली के पश्चिम विहार इलाके में प्रॉपर्टी डीलर राजकुमार दलाल की हत्या के मामले में जेल में बंद है। अनुराग को भी इस मामले में वांछित बताया गया था और उसके खिलाफ अदालत से 10 अप्रैल 2026 को गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था। गिरफ्तारी के बाद अनुराग मिश्रा को दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया गया।
दूसरी गिरफ्तारी पुष्कर पांडेय की हुई, जिसे उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की समीक्षा अधिकारी/सहायक समीक्षा अधिकारी यानी RO/ARO प्रारंभिक परीक्षा-2023 के पेपर लीक मामले में वांछित बताया गया है। यह मामला प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा बेहद महत्वपूर्ण प्रकरण रहा है। परीक्षा के प्रश्नपत्र के कथित लीक होने के बाद जांच STF को सौंपी गई थी और मामले में लगातार गिरफ्तारियां होती रही हैं। पुष्कर पांडेय लगभग दो साल से जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर था।
STF की कार्रवाई के बाद इस पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 32 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर लीक की पूरी साजिश में आरोपियों की क्या भूमिका थी और उनके संपर्क किन-किन लोगों से थे। लंबे समय से फरार आरोपियों की गिरफ्तारी से जांच में आगे की कड़ियां सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।
RO/ARO परीक्षा पेपर लीक प्रकरण ने उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इससे पहले भी STF ने इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। जांच में कथित तौर पर परीक्षा प्रश्नपत्र को परीक्षा से पहले हासिल करने और उसे अन्य लोगों तक पहुंचाने की साजिश की बात सामने आई थी। मामले में अलग-अलग आरोपियों की भूमिका की जांच लगातार आगे बढ़ती रही है।
STF की ताजा कार्रवाई का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू संगठित अपराध से जुड़ा है। नंदू गैंग से जुड़े संदिग्धों पर कार्रवाई दिल्ली और अन्य क्षेत्रों में चल रही आपराधिक जांचों से भी जुड़ रही है। अनुराग मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद उसे दिल्ली पुलिस को सौंपे जाने से साफ है कि उसकी कथित आपराधिक गतिविधियों की जांच केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। अब संबंधित एजेंसियां उससे पूछताछ कर उसके नेटवर्क और अन्य संभावित सहयोगियों के बारे में जानकारी जुटा सकती हैं।
उत्तर प्रदेश STF की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राज्य में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था और सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता दोनों बड़े मुद्दे बने हुए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में लगातार कार्रवाई का उद्देश्य परीक्षा माफिया और उससे जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना भी माना जा रहा है।
कुल मिलाकर, लखनऊ में STF की दो अलग-अलग मामलों में हुई कार्रवाई ने संगठित अपराध और भर्ती परीक्षा पेपर लीक नेटवर्क के खिलाफ जांच को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। नंदू गैंग से जुड़े कथित सदस्य और लंबे समय से फरार RO/ARO पेपर लीक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियों की नजर इस बात पर है कि इन मामलों के पीछे सक्रिय अन्य लोगों और नेटवर्क तक कैसे पहुंचा जाए।
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