Last updated: June 29th, 2026 at 03:22 pm

उत्तराखंड सरकार ने राज्य में नागरिकों के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के उद्देश्य से ‘देवभूमि परिवार कानून’ लागू करने का फैसला किया है। इस नई व्यवस्था के तहत राज्य में पिछले 15 वर्षों से निवास कर रहे लोगों को देवभूमि परिवार आईडी जारी की जाएगी।
सरकार के अनुसार, जिन लोगों के पास यह परिवार आईडी नहीं होगी, उन्हें भविष्य में विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने में कठिनाई हो सकती है। इस पहल का उद्देश्य राज्य के नागरिकों का एक केंद्रीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है, जिससे लाभार्थियों की पहचान और योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।
नई व्यवस्था में नागरिकों के डेटा की सुरक्षा को भी विशेष महत्व दिया गया है। कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति डेटाबेस से छेड़छाड़ करता है, बिना अनुमति डेटा तक पहुंचने की कोशिश करता है, वायरस डालता है या डेटा को नुकसान पहुंचाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा और कम से कम 50 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति गलत जानकारी देकर अपनी पहचान बदलने या फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आईडी प्राप्त करने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ 3 वर्ष तक की सजा और 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य राज्य में पारदर्शी प्रशासन को बढ़ावा देना, सरकारी योजनाओं का सही लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करना और नागरिकों के डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित बनाना है।
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