Last updated: May 3rd, 2026 at 05:48 am

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में इस बार भारी संख्या में मतदाताओं ने अपने अधिकार का इस्तेमाल किया। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद कुल 6.82 करोड़ से अधिक मतदाताओं को वोट डालने का अवसर मिला, जो राज्य की लोकतांत्रिक भागीदारी को दर्शाता है।
इस दौरान कई ऐसे मामले भी सामने आए, जहां कुछ लोगों को अंतिम समय तक यह स्पष्ट नहीं था कि वे मतदान कर पाएंगे या नहीं। दरअसल, अपील प्रक्रिया के निपटारे के बाद अंतिम सूची में 1,600 से अधिक मतदाताओं के नाम जोड़े गए, जिससे उन्हें वोट देने का मौका मिल सका।
चुनाव आयोग द्वारा मतदान से ठीक पहले पूरक मतदाता सूची जारी की गई थी। पहली सूची में 139 नए नाम जोड़े गए, जबकि कुछ नाम हटाए भी गए। वहीं दूसरी सूची के जरिए 1,400 से ज्यादा मतदाता सूची में शामिल हुए।
हालांकि, इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में आवेदन खारिज भी किए गए। आयोग के आंकड़ों के अनुसार, करीब 60 लाख लंबित मामलों में से 27 लाख से अधिक आवेदकों को अपात्र घोषित किया गया। इन मामलों को आगे अपील के लिए न्यायाधिकरण के पास भेजा गया है।
फिलहाल शेष मामलों की सुनवाई जारी है। चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस तरह की समीक्षा को अहम माना जा रहा है, जिससे सही और पात्र मतदाताओं को ही मतदान का अधिकार मिल सके।
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