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“चुनाव में EVM की सुरक्षा का किला, जानिए ‘स्ट्रॉन्ग रूम’ के सख्त नियम और इंतजाम”

भारत में चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाए रखने के लिए ‘स्ट्रॉन्ग रूम’ की भूमिका बेहद अहम होती है।
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भारत में चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाए रखने के लिए ‘स्ट्रॉन्ग रूम’ की भूमिका बेहद अहम होती है। मतदान समाप्त होने के बाद सभी ईवीएम और वीवीपैट मशीनों को इन्हीं विशेष रूप से सुरक्षित कमरों में रखा जाता है, जहां उनकी चौबीसों घंटे निगरानी होती है।

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    स्ट्रॉन्ग रूम के चयन के लिए निर्वाचन आयोग ने सख्त दिशा-निर्देश तय किए हैं। आमतौर पर इन्हें सरकारी भवनों जैसे स्कूल, कॉलेज, स्टेडियम या सरकारी कार्यालय—में ही बनाया जाता है। सुरक्षा कारणों से पुलिस थानों को इस सूची से बाहर रखा जाता है।

    इन कमरों की संरचना भी बेहद खास होती है। स्ट्रॉन्ग रूम में आमतौर पर केवल एक ही प्रवेश द्वार होता है और खिड़की-दरवाजों को पूरी तरह सील कर दिया जाता है, ताकि किसी भी तरह की छेड़छाड़ की संभावना खत्म हो सके।

    सुरक्षा के लिहाज से यहां बहुस्तरीय व्यवस्था लागू की जाती है। अंदर केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात रहते हैं, जबकि बाहर राज्य सशस्त्र पुलिस निगरानी करती है। इसके अलावा तीसरी परत के रूप में स्थानीय पुलिस भी मौजूद रहती है।

    इतना ही नहीं, पूरे परिसर की 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है, जिससे हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। यही वजह है कि स्ट्रॉन्ग रूम को चुनावी प्रक्रिया का सबसे सुरक्षित और संवेदनशील हिस्सा माना जाता है।

    चुनाव परिणाम घोषित होने तक ये सुरक्षा व्यवस्था लगातार जारी रहती है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि मतों की सुरक्षा पूरी तरह बरकरार रहे।

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