Last updated: April 16th, 2026 at 12:52 pm

लोकसभा में महिला आरक्षण समेत तीन महत्वपूर्ण विधेयकों के पेश होते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिसमें कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने सरकार को घेरने की कोशिश की, वहीं भाजपा ने भी जोरदार जवाब दिया।
कांग्रेस का आरोप, लोकतंत्र पर हमला
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ये विधेयक भारतीय लोकतंत्र को “हाईजैक” करने की कोशिश हैं। उन्होंने इसे असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि इससे पहले की सरकारों द्वारा स्थापित सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ सकती है।
सपा ने उठाया आरक्षण में वर्गीय प्रतिनिधित्व का मुद्दा
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने महिला आरक्षण बिल पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसमें पिछड़े वर्ग और मुस्लिम महिलाओं को शामिल किए बिना यह अधूरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस बिल के जरिए संवेदनशील मुद्दों को छिपाने की कोशिश कर रही है। इस मुद्दे पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि केंद्र सरकार जाति जनगणना से बच रही है, क्योंकि इससे आरक्षण की मांग और तेज हो सकती है।
सरकार का जवाब, संविधान के तहत ही होगा निर्णय
केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सरकार पूरे देश की महिलाओं के हित में काम कर रही है। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ नेता जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जनगणना की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सरकार जाति जनगणना को लेकर भी निर्णय ले चुकी है, हालांकि फिलहाल मकानों की गिनती की जा रही है।
राजनीतिक माहौल गरम
महिला आरक्षण बिल को लेकर संसद में जारी यह टकराव आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। यह मुद्दा न सिर्फ संसद बल्कि देश की राजनीति में भी बड़ा प्रभाव डालने वाला माना जा रहा है।
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