Last updated: September 23rd, 2026 at 01:41 pm

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में मंगलवार शाम एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हुए विवाद ने गंभीर हिंसक रूप ले लिया। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में एक व्यक्ति ने कथित तौर पर अपनी पत्नी और पूजा कराने आए दो पुजारियों पर गोली चला दी। तीनों की मौत के बाद आरोपी अपने तीन बच्चों के साथ घर के अंदर एक कमरे में बंद हो गया। करीब सात से आठ घंटे तक चले पुलिस ऑपरेशन के बाद आरोपी की पुलिस कार्रवाई में मौत हो गई। इस दौरान उसका एक बेटा भी गोली लगने से घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई।
पुलिस के मुताबिक आरोपी की पहचान अरविंद सिंह के रूप में हुई है। घटना उस समय हुई जब उसके घर में कई दिनों से धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था। परिवार की ओर से यह पूजा उसके बड़े भाई की मौत के बाद कराई जा रही थी। पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार परिवार के कुछ सदस्यों का मानना था कि अरविंद के व्यवहार से जुड़ी समस्या को धार्मिक अनुष्ठान के जरिए ठीक किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से घर में पूजा रखी गई थी। हालांकि घटना के कारणों को लेकर पुलिस की विस्तृत जांच अभी जारी है।
बताया गया है कि मंगलवार को अरविंद जब घर लौटा, तब वहां पूजा चल रही थी। घर में मौजूद पुजारियों को देखकर उसका विवाद शुरू हो गया। पुलिस और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार उसने पुजारियों की पहचान को लेकर सवाल उठाए और उनके आधार कार्ड मांगने लगा। बातचीत बढ़ने के बाद विवाद काफी गंभीर हो गया। इसी दौरान उसने कथित तौर पर घर में रखी लाइसेंसी रिवॉल्वर निकाल ली और गोली चला दी।
पुलिस के अनुसार गोलीबारी में अरविंद की पत्नी बबीता और पूजा कराने वाले दो पुजारी महेंद्र पाठक तथा अखिलेश मिश्रा की मौत हो गई। घटना के समय घर में अन्य लोग भी मौजूद थे। दो अन्य पुजारियों के वहां से निकलकर सुरक्षित भाग जाने की बात भी सामने आई है। तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद अपने बच्चों को लेकर घर के अंदर चला गया और एक कमरे में खुद को बंद कर लिया।
घटना की सूचना मिलते ही आजमगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी और कई थानों की टीमें मौके पर पहुंचीं। पुलिस ने घर को चारों तरफ से घेर लिया। सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि आरोपी के साथ उसके छोटे बच्चे भी कमरे में मौजूद थे। पुलिस ने शुरुआत में बल प्रयोग करने के बजाय बातचीत के जरिए उसे आत्मसमर्पण करने और बच्चों को सुरक्षित बाहर भेजने के लिए मनाने की कोशिश की। परिवार के सदस्यों की मदद भी ली गई।
करीब सात घंटे तक पुलिस और आरोपी के बीच गतिरोध बना रहा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी लगातार आत्मसमर्पण से इनकार कर रहा था। इसी दौरान घर के अंदर से गोली चलने की आवाज सुनाई दी। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने अपने एक बेटे को गोली मार दी थी। इसके बाद बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।
बच्चों को बचाने के लिए पुलिस ने घर में प्रवेश किया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ऑपरेशन के दौरान स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया। पुलिस के घर में प्रवेश करने के बाद आरोपी ने कथित तौर पर पुलिस टीम पर अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर से गोलियां चलाईं। पुलिस ने जवाबी गोलीबारी की, जिसमें अरविंद गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे और घायल बेटे को अस्पताल ले जाया गया, जहां दोनों की मौत हो गई।
अरविंद के दो अन्य बच्चों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। रिपोर्टों के अनुसार दोनों बेटियों को भी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार किया गया। लंबे समय तक घर के अंदर रहने के कारण बच्चों पर घटना का गंभीर प्रभाव पड़ा। पुलिस और प्रशासन की प्राथमिकता उन्हें सुरक्षित निकालने और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की रही।
घटना के बाद पुलिस ने मृतकों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं। घटनास्थल से हथियार और अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। फोरेंसिक टीम ने भी मौके से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विवाद किस क्रम में बढ़ा और गोलीबारी की पूरी घटना कैसे हुई।
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