Last updated: August 18th, 2026 at 11:00 am

उत्तर प्रदेश के कानपुर समेत प्रदेश की कई मंडियों में कृषि उत्पादों की जियो टैगिंग व्यवस्था करीब 11 घंटे तक ठप रहने से सोमवार को कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ। सर्वर और OTP से जुड़ी तकनीकी समस्या के कारण व्यापारियों के मोबाइल पर जरूरी OTP नहीं पहुंचा। इसके चलते कृषि उत्पादों से लदे वाहनों की जियो टैगिंग और गेटपास जारी करने की प्रक्रिया रुक गई। सबसे ज्यादा असर जल्दी खराब होने वाली हरी सब्जियों के कारोबार पर पड़ा। व्यापारियों का दावा है कि इस तकनीकी समस्या के कारण प्रदेशभर में करोड़ों रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ।
जानकारी के अनुसार, समस्या सोमवार तड़के करीब चार बजे शुरू हुई और दोपहर तीन बजे तक बनी रही। इस दौरान मंडियों में पहुंचे कई वाहनों के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। गेटपास जारी नहीं होने के कारण वाहन आगे नहीं बढ़ सके और मंडियों में ही खड़े रहे। कृषि उत्पादों का कारोबार समयबद्ध होने के कारण लंबे समय तक वाहनों के रुकने का सीधा असर किसानों और व्यापारियों पर पड़ा।
चकरपुर मंडी में ही करीब 10 लाख रुपये की सब्जियों की आवाजाही प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। अन्य मंडियों में भी इसी तरह की परेशानी हुई। कई ग्रामीण मंडियों में किसान अपनी उपज लेकर पहुंचे थे, लेकिन जियो टैगिंग और गेटपास की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उनकी उपज की खरीद तक नहीं हो सकी। कुछ किसानों को अपनी कृषि उपज वापस लेकर लौटना पड़ा।
समस्या का सबसे गंभीर प्रभाव हरी सब्जियों पर पड़ा। सब्जियां जल्दी खराब होने वाली कृषि उपज हैं और उन्हें मंडी तक पहुंचने के बाद जल्द बेचने और आगे भेजने की आवश्यकता होती है। वाहनों के लंबे समय तक खड़े रहने से कारोबारियों को नुकसान का सामना करना पड़ा। व्यापारियों ने बताया कि केवल सब्जियों ही नहीं, बल्कि गल्ला, दलहन, दाल, तिलहन और किराना कारोबार भी तकनीकी समस्या से प्रभावित हुआ।
व्यापारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की 251 मंडियों में एक जुलाई से जियो ऐप आधारित वाहन टैगिंग व्यवस्था लागू की गई है। नई व्यवस्था का उद्देश्य कृषि उत्पादों से जुड़े वाहनों की आवाजाही को डिजिटल तरीके से रिकॉर्ड और नियंत्रित करना है। हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि व्यवस्था लागू होने के बाद से ही कई मंडियों में तकनीकी और व्यावहारिक परेशानियां सामने आ रही हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में टैगिंग प्रक्रिया में कई घंटे लगने की शिकायत की गई है।
सोमवार को OTP नहीं मिलने के कारण व्यापारियों ने हेल्प डेस्क और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की। इसके बाद दोपहर करीब तीन बजे कॉमन OTP जारी किया गया, जिसके बाद गेटपास बनना शुरू हो सका और मंडियों में रुके वाहनों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य हुई। मंडी समिति के अधिकारियों ने तकनीकी समस्या को सर्वर से जुड़ी दिक्कत बताया।
इस घटना के बाद व्यापारियों ने जियो टैगिंग व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है। व्यापारियों की प्रमुख मांग है कि एक जुलाई से लागू जियो ऐप आधारित वाहन टैगिंग व्यवस्था की समीक्षा की जाए और तकनीकी समस्याओं का स्थायी समाधान होने तक इसे वापस लेने पर विचार किया जाए।
व्यापारियों ने गेटपास की समय-सीमा को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कुछ मंडियों में ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि जरूरी दस्तावेज पूरे होने और वाहन की टैगिंग हो जाने के बावजूद निर्धारित समय सीमा समाप्त होने का हवाला देकर वाहनों को रोका जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि तकनीकी खराबी के कारण यदि OTP या गेटपास समय पर नहीं बनता है तो इसकी जिम्मेदारी व्यापारियों और किसानों पर नहीं डाली जानी चाहिए।
कृषि कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था तभी प्रभावी हो सकती है जब उसका सर्वर और तकनीकी ढांचा लगातार काम करे। यदि तकनीकी खराबी के कारण कई घंटे तक वाहनों की आवाजाही रुकती है, तो इसका सीधा आर्थिक नुकसान किसानों और व्यापारियों को उठाना पड़ता है।
तकनीकी समस्या के बाद गेटपास व्यवस्था शुरू हो चुकी है, लेकिन व्यापारियों की शिकायतों ने नई जियो टैगिंग प्रणाली की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब व्यापारियों की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस समस्या को दोबारा होने से रोकने के लिए क्या कदम उठाता है।
मंडियों में कृषि कारोबार को सुचारु रखने के लिए तकनीकी व्यवस्था का भरोसेमंद होना बेहद जरूरी है। खासकर सब्जियों और अन्य जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के मामले में कुछ घंटों की देरी भी बड़ा आर्थिक नुकसान कर सकती है। ऐसे में व्यापारियों और किसानों की मांग है कि तकनीकी खामियों को जल्द दूर किया जाए और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें सर्वर या OTP की समस्या आने पर वैकल्पिक प्रक्रिया के जरिए कृषि उत्पादों की आवाजाही जारी रखी जा सके।
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