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दिल्ली में BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक, जलवायु और सतत विकास पर सहयोग बढ़ाने पर जोर

नई दिल्ली में मंगलवार को 12वीं BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक आयोजित की गई। भारत की BRICS अध्यक्षता 2026 के
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नई दिल्ली में मंगलवार को 12वीं BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक आयोजित की गई। भारत की BRICS अध्यक्षता 2026 के तहत हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में सदस्य देशों के पर्यावरण मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की।

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    इस वर्ष भारत की BRICS अध्यक्षता का मुख्य विषय ‘Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability’ रखा गया है। इसी व्यापक सोच के तहत पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनका सीधा संबंध जलवायु परिवर्तन से निपटने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और भविष्य की पीढ़ियों के लिए टिकाऊ विकास सुनिश्चित करने से है।

    बैठक से पहले सोमवार को BRICS Environment Working Group और Climate Change and Sustainable Development से जुड़े Contact Group की वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें BRICS देशों के अधिकारियों ने पर्यावरण और जलवायु से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। मंगलवार को इन्हीं चर्चाओं को मंत्री स्तर पर आगे बढ़ाया गया।

    भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता के दौरान पर्यावरण के क्षेत्र में कुछ प्रमुख प्राथमिकताएं तय की हैं। इनमें टिकाऊ जीवनशैली, वनों का संरक्षण, वनाग्नि प्रबंधन, आपदा से निपटने की क्षमता, सर्कुलर इकोनॉमी और जलवायु परिवर्तन के अनुकूलन जैसे विषय शामिल हैं। बैठक में इन क्षेत्रों में सदस्य देशों के अनुभवों और बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने पर जोर दिया गया।

    पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य संसाधनों के इस्तेमाल को अधिक प्रभावी बनाना, कचरे को कम करना और उत्पादों तथा सामग्रियों का दोबारा उपयोग बढ़ाना है। BRICS देशों के बीच इस क्षेत्र में नीतियों और तकनीकों का आदान-प्रदान विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए उपयोगी हो सकता है।

    बैठक में जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रही चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। विकासशील देशों के सामने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के साथ-साथ आर्थिक विकास को बनाए रखने की चुनौती है। ऐसे में जलवायु अनुकूलन, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत ने BRICS मंच के माध्यम से सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। विभिन्न देशों में पर्यावरण से संबंधित अलग-अलग अनुभव और तकनीकी क्षमताएं हैं। इन्हें साझा करने से वन संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, जलवायु अनुकूलन और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में बेहतर समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

    बैठक के दौरान BRICS Environment Working Group द्वारा तैयार किए गए चार ज्ञान-संग्रह भी जारी किए गए। इनमें टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देने की राष्ट्रीय पहल, एकीकृत वनाग्नि प्रबंधन, भू-दृश्य आधारित हरितीकरण और Extended Producer Responsibility तथा सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़ी बेहतर कार्यप्रणालियों को शामिल किया गया है। इन दस्तावेजों में सदस्य देशों के अनुभवों, स्थानीय ज्ञान और नए समाधानों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है।

    BRICS में शामिल देशों के लिए पर्यावरण संबंधी सहयोग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इन देशों की आबादी और अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके बीच पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी नीतियों और तकनीकों का सहयोग व्यापक स्तर पर प्रभाव डाल सकता है।

    नई दिल्ली में हुई बैठक को भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता के दौरान पर्यावरण एजेंडे को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत इस मंच के जरिए जलवायु परिवर्तन से निपटने के साथ-साथ विकासशील देशों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक समाधान पर जोर दे रहा है।

    बैठक का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि पर्यावरणीय नीतियों में केवल सरकारी प्रयासों के बजाय तकनीक, नवाचार और आम लोगों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया। टिकाऊ जीवनशैली और संसाधनों के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए नागरिकों की भूमिका को बढ़ाना लंबे समय में पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है।

    BRICS देशों के बीच इस तरह का सहयोग भविष्य में संयुक्त परियोजनाओं, तकनीकी साझेदारी और नीतिगत अनुभवों के आदान-प्रदान का आधार बन सकता है। नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद अब सदस्य देशों के बीच पर्यावरण और जलवायु क्षेत्र में तय प्राथमिकताओं को लागू करने की दिशा में आगे की गतिविधियों पर नजर रहेगी।

    भारत की BRICS अध्यक्षता में आयोजित यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं, वन संरक्षण और संसाधनों के टिकाऊ इस्तेमाल की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में BRICS देशों के बीच मजबूत पर्यावरणीय सहयोग को वैश्विक सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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