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लखनऊ में 250 छात्राओं का सड़क पर प्रदर्शन, शिक्षकों की कमी और सुविधाओं को लेकर जताया विरोध

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय की करीब 250 छात्राओं ने शिक्षकों की कमी और
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालय की करीब 250 छात्राओं ने शिक्षकों की कमी और स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की समस्या को लेकर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया। छात्राएं स्कूल परिसर से करीब 2.5 किलोमीटर दूर डुबग्गा-कानपुर बाईपास तक पहुंचीं और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। बारिश के बीच हुए इस प्रदर्शन से इलाके में यातायात भी प्रभावित हुआ और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर छात्राओं से बातचीत करनी पड़ी।

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    छात्राओं का कहना था कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। खासतौर पर विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के सामने विषयवार शिक्षकों की कमी बड़ी समस्या बन गई है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए नियमित कक्षाएं नहीं होने से भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।

     

    प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति के साथ-साथ अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को भी उठाया। छात्राओं के अनुसार, उन्होंने पहले भी अपनी समस्याओं के बारे में स्कूल और संबंधित अधिकारियों को जानकारी दी थी, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं होने के बाद उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।

     

    सोमवार को छात्राएं स्कूल से निकलकर डुबग्गा-कानपुर बाईपास और आसपास के प्रमुख चौराहों की ओर गईं। भारी बारिश के बावजूद छात्राओं ने प्रदर्शन जारी रखा। कुछ छात्राओं ने हाथों में हाथ डालकर मानव श्रृंखला बनाई और सड़क पर बैठकर अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाया। प्रदर्शन के कारण सुबह के समय यातायात प्रभावित हुआ और वाहनों की आवाजाही में परेशानी हुई।

     

    मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने छात्राओं से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी शिकायतें सुनीं और समस्या के समाधान का भरोसा दिलाया। इसके बाद छात्राओं को वापस स्कूल ले जाया गया और अधिकारियों ने विद्यालय में भी उनसे बातचीत की।

     

    छात्राओं की सबसे बड़ी शिकायत शिक्षकों की कमी को लेकर रही। बताया गया कि विज्ञान वर्ग में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भौतिकी और जीव विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के लिए पर्याप्त शिक्षकों की उपलब्धता नहीं होने से नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की बात सामने आई है। रसायन विज्ञान के शिक्षक की उपलब्धता के बावजूद विद्यार्थियों की जरूरत के हिसाब से विषयवार शिक्षण व्यवस्था पूरी नहीं होने की शिकायत की गई।

     

    यह मामला केवल एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। इससे कुछ दिन पहले इसी विद्यालय के छात्रों ने भी शिक्षकों की कमी और स्कूल की अन्य समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था। लगातार दो प्रदर्शनों के बाद शिक्षा और सामाजिक कल्याण विभाग के अधिकारियों का ध्यान इस समस्या की ओर गया है।

     

    उत्तर प्रदेश के सामाजिक कल्याण मंत्री असीम अरुण ने भी शिक्षकों की कमी को वास्तविक समस्या माना है। उनके अनुसार, अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण कुछ पद खाली हैं। विभाग की ओर से इस मामले में अपना पक्ष अदालत के सामने रखा गया है और शिक्षकों की कमी को दूर करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया पर नजर रखी जा रही है।

     

    मंत्री ने यह भी कहा है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होनी चाहिए और शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है। विभाग की ओर से स्कूल की स्थिति की समीक्षा करने और विद्यार्थियों की समस्याओं को दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

     

    छात्राओं के प्रदर्शन ने सरकारी आवासीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। ऐसे विद्यालयों में रहने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई, भोजन, स्वास्थ्य और अन्य दैनिक जरूरतों की जिम्मेदारी संस्थान पर होती है। इसलिए शिक्षकों की कमी जैसी समस्या का सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा और उनके भविष्य पर पड़ सकता है।

     

    विशेष रूप से कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थियों के लिए नियमित विषयवार कक्षाएं महत्वपूर्ण होती हैं। बोर्ड परीक्षाओं के साथ कई छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी करते हैं। ऐसे में लंबे समय तक शिक्षकों की कमी रहने से विद्यार्थियों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

     

    प्रदर्शन के बाद प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती छात्राओं की मांगों को जल्द पूरा करना है। यदि पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति और अन्य समस्याओं का समाधान समय पर होता है तो स्कूल में पढ़ाई का माहौल सामान्य होने की उम्मीद है। वहीं, समाधान में देरी होने पर विद्यार्थियों की नाराजगी दोबारा सामने आ सकती है।

     

    लखनऊ की इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी विद्यालयों में केवल भवन और अन्य सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षक, नियमित कक्षाएं और विद्यार्थियों की शिकायतों का समय पर समाधान भी जरूरी है। अब छात्राओं की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनकी मांगों को कितनी जल्दी पूरा किया जाता है।

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