Last updated: July 13th, 2026 at 02:23 pm

केंद्र सरकार ने देश के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र को तेजी से बढ़ते साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से ‘डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025–26’ जारी की है। इस रिपोर्ट में बैंकों, वित्तीय संस्थानों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और अन्य डिजिटल वित्तीय संगठनों के लिए नई सुरक्षा सिफारिशें दी गई हैं। सरकार का कहना है कि डिजिटल लेनदेन में लगातार वृद्धि के साथ साइबर अपराधियों की गतिविधियां भी बढ़ रही हैं, इसलिए साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में फिशिंग, रैनसमवेयर, डेटा चोरी, डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी, नकली वेबसाइटों और सोशल इंजीनियरिंग जैसे साइबर हमलों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। ऐसे हमलों से केवल वित्तीय संस्थानों को ही नहीं, बल्कि आम ग्राहकों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट में आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों को अपनाने और साइबर जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने की सलाह दी गई है।
रिपोर्ट में बैंकों और वित्तीय संस्थानों को मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, रियल-टाइम साइबर मॉनिटरिंग और नियमित सुरक्षा ऑडिट लागू करने की सिफारिश की गई है। इसके अलावा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित साइबर सुरक्षा समाधान अपनाने पर भी जोर दिया गया है ताकि संदिग्ध गतिविधियों की समय रहते पहचान की जा सके और संभावित हमलों को रोका जा सके।
सरकार ने कर्मचारियों के नियमित साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण को भी महत्वपूर्ण बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, कई साइबर हमले तकनीकी कमजोरियों के बजाय मानवीय भूल का फायदा उठाकर किए जाते हैं। इसलिए बैंक कर्मचारियों और अन्य वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण देकर नई साइबर चुनौतियों से अवगत कराना आवश्यक है। साथ ही ग्राहकों को भी सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के प्रति जागरूक बनाने की आवश्यकता बताई गई है।
रिपोर्ट में क्लाउड कंप्यूटिंग, डिजिटल बैंकिंग और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसे तेजी से बढ़ते डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है, इसलिए इन प्रणालियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में वित्तीय संस्थानों को अपने साइबर सुरक्षा ढांचे की नियमित समीक्षा करने और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत करने की सलाह दी गई है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ साइबर अपराधियों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में केवल तकनीकी समाधान पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि संस्थानों, सरकार और आम नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय भी आवश्यक है। उन्होंने ग्राहकों से भी अपील की कि वे किसी भी संदिग्ध लिंक, कॉल या ईमेल पर व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी साझा न करें तथा केवल आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें।
केंद्र सरकार का कहना है कि देश के वित्तीय तंत्र को सुरक्षित रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से विभिन्न नियामक संस्थाओं और वित्तीय संगठनों के साथ मिलकर साइबर सुरक्षा ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है। आने वाले समय में रिपोर्ट की सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल थ्रेट रिपोर्ट 2025–26 भारत के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज साबित हो सकती है। इससे न केवल संस्थानों की साइबर सुरक्षा क्षमता बढ़ेगी, बल्कि ग्राहकों का डिजिटल वित्तीय सेवाओं पर विश्वास भी और मजबूत होगा।
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