Last updated: July 13th, 2026 at 02:20 pm

वर्ष 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को हत्या के मामले में दोषी करार दिया। यह फैसला दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक माना जा रहा है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य दस्तावेजों के आधार पर आरोप सिद्ध होते हैं। हालांकि कुछ आरोपों में अदालत ने अलग निष्कर्ष भी निकाले, लेकिन हत्या के मामले में दोषसिद्धि बरकरार रखी गई। अब सभी दोषियों की सजा पर अलग से सुनवाई होगी, जिसमें अदालत सजा की अवधि तय करेगी।
यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा है। दंगों के दौरान आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा लापता हो गए थे और बाद में उनका शव एक नाले से बरामद हुआ था। इस घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इसके बाद दिल्ली पुलिस की विशेष जांच टीम ने विस्तृत जांच शुरू की और कई लोगों को गिरफ्तार किया। मामले की सुनवाई पिछले कई वर्षों से अदालत में चल रही थी।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने कई गवाहों के बयान, डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों का विरोध करते हुए अपने तर्क रखे। दोनों पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे सोमवार को सुनाया गया।
फैसले के बाद अदालत परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरे क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस फैसले को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों ने अदालत के निर्णय पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है। कुछ नेताओं ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण बताया, जबकि अन्य ने कहा कि अंतिम कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक सभी पक्षों को अदालत के निर्णय का सम्मान करना चाहिए। चूंकि मामला न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है, इसलिए सभी पक्षों ने कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रखने की बात कही है।
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि इतने चर्चित मामलों में अदालत का निर्णय केवल संबंधित पक्षों के लिए ही नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण होता है। उनका मानना है कि लंबी सुनवाई के बाद आए फैसले से यह स्पष्ट होता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक प्रक्रिया साक्ष्यों और कानूनी तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ती है। यदि किसी पक्ष को फैसले पर आपत्ति होती है, तो उसे उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार प्राप्त है।
इस मामले में दोषियों की सजा पर अदालत की अगली सुनवाई का इंतजार किया जा रहा है। अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद यह स्पष्ट होगा कि दोषियों को किस प्रकार का दंड दिया जाएगा। यह फैसला 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णयों में से एक माना जा रहा है और आने वाले दिनों में इस पर कानूनी तथा राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।
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