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चित्रकूट ब्लास्ट में मृत युवक की पहचान अब भी पहेली, 234 मोबाइल नंबर सर्विलांस पर

  उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में 12 सितंबर को हुए भीषण विस्फोट की जांच लगातार आगे बढ़ रही है, लेकिन
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    उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में 12 सितंबर को हुए भीषण विस्फोट की जांच लगातार आगे बढ़ रही है, लेकिन कई दिन बीतने के बाद भी धमाके में मारे गए युवक की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस को घटनास्थल से अभी तक शरीर के केवल दो कटे और जले हुए पैर मिले हैं। सिर और धड़ समेत शरीर के अन्य हिस्सों का अब तक पता नहीं चल पाया है। मृतक की पहचान के लिए पुलिस ने आसपास के गांवों के 234 से अधिक मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगाया है।

     

    मामला चित्रकूट के पहाड़ी थाना क्षेत्र के अशोह गांव के पास एक खाली प्लॉट का है। 12 सितंबर की शाम करीब पांच बजे यहां अचानक तेज धमाका हुआ था। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि मौके पर मौजूद एक युवक के शरीर के टुकड़े दूर तक बिखर गए। घटना के बाद पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने इलाके को घेरकर साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया।

     

    घटनास्थल की तलाशी के दौरान पुलिस को मानव शरीर के अवशेष मिले। हालांकि काफी तलाश के बावजूद मृतक का सिर और धड़ नहीं मिल सका। पुलिस ने खेतों, झाड़ियों और आसपास के खाली प्लॉटों में भी तलाशी अभियान चलाया। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से बैटरी, तार और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों सहित कई वस्तुएं जांच के लिए एकत्र की हैं। विस्फोट में इस्तेमाल सामग्री की सही प्रकृति का पता फॉरेंसिक जांच के बाद ही चल सकेगा।

     

    मृतक की पहचान करना पुलिस के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी के तहत अशोह, बाबूपुर और आसपास के गांवों में सक्रिय रहे 234 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विस्फोट के समय घटनास्थल के आसपास कौन-कौन मौजूद था और किन लोगों की गतिविधियां संदिग्ध परिस्थितियों से जुड़ती हैं। साथ ही ग्रामीणों, खेतों में काम करने वाले मजदूरों और चरवाहों से भी पूछताछ की जा रही है।

     

    जांच का एक हिस्सा आसपास के खनन क्षेत्रों तक भी पहुंच गया है। पुलिस ऐसी संभावना की जांच कर रही है कि मृतक किसी खदान में काम करने वाला मजदूर तो नहीं था। चित्रकूट और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मजदूर खदानों और क्रशर इकाइयों में काम करते हैं। पुलिस टीमों ने खनन क्षेत्रों में जाकर मजदूरों की जानकारी जुटाई है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हाल में कोई व्यक्ति अचानक लापता तो नहीं हुआ।

     

    पुलिस ने चित्रकूट के अलावा पड़ोसी कौशांबी जिले में भी मृतक की पहचान के लिए जानकारी जुटानी शुरू की है। अलग-अलग थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्टों को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आसपास के किसी इलाके से कोई ऐसा व्यक्ति लापता हुआ है या नहीं, जिसकी उम्र और परिस्थितियां घटनास्थल से मिले अवशेषों से मेल खाती हों।

     

    जांच में एक झोला भी महत्वपूर्ण सुराग के रूप में सामने आया है। घटनास्थल के पास मिले झोले का संबंध कौशांबी से जुड़ता बताया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि झोला किसने खरीदा था और वह अशोह गांव तक कैसे पहुंचा। इस सुराग के आधार पर जांच टीम कौशांबी में भी जानकारी जुटा रही है।

     

    घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच के लिए विशेष टीम भी गठित की है। सर्विलांस, एसओजी और स्थानीय पुलिस की टीमें अलग-अलग पहलुओं पर काम कर रही हैं। इसके अलावा घटनास्थल से मिले अवशेषों और सामग्री को वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा गया है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विस्फोट किस प्रकार के पदार्थ से हुआ और वहां वह सामग्री किस उद्देश्य से मौजूद थी।

     

    पुलिस का मुख्य फोकस मृतक की पहचान और विस्फोट के स्रोत का पता लगाने पर है। पहचान होने के बाद जांच में कई अहम सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है कि युवक घटनास्थल तक कैसे पहुंचा, उसके पास विस्फोटक सामग्री कैसे आई और विस्फोट किन परिस्थितियों में हुआ।

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