Last updated: October 27th, 2026 at 03:33 pm

दिल्ली में छठ पूजा से पहले यमुना नदी की स्थिति एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। मंगलवार, 27 अक्टूबर को कालिंदी कुंज के पास नदी की सतह पर सफेद झाग की मोटी परत दिखाई दी। नदी में तैरते झाग की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद जल प्रदूषण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब दिल्ली सरकार यमुना की सफाई और कायाकल्प के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम करने का दावा कर रही है। आगामी छठ महापर्व को देखते हुए नदी के किनारे पूजा करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और घाटों की स्वच्छता को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
यमुना में सफेद झाग दिखाई देने की समस्या नई नहीं है। दिल्ली में खासकर ओखला बैराज और कालिंदी कुंज के आसपास सर्दियों की शुरुआत के दौरान नदी की सतह पर झाग जमा होने की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। तापमान में गिरावट, पानी का धीमा प्रवाह और प्रदूषक तत्वों की मौजूदगी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं। नदी में बहने वाले घरेलू सीवेज, डिटर्जेंट और औद्योगिक अपशिष्ट में मौजूद रासायनिक पदार्थ झाग बनने से जुड़े प्रमुख कारकों में शामिल हैं। हालांकि, इस बार दिखाई दिए झाग की सटीक संरचना और उसमें मौजूद प्रदूषकों की मात्रा की पुष्टि के लिए जल गुणवत्ता की जांच आवश्यक है।
छठ पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यमुना के घाटों पर पहुंचते हैं। व्रती नदी के किनारे सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और कई स्थानों पर पानी में उतरकर पूजा करते हैं। ऐसे में नदी की गुणवत्ता का सवाल केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य और धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था से भी जुड़ जाता है। प्रदूषित पानी के संपर्क में आने से त्वचा में जलन या संक्रमण का खतरा हो सकता है। यदि पानी में हानिकारक रसायन या रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीव मौजूद हों, तो स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और बढ़ सकते हैं।
दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों के सामने त्योहार से पहले घाटों की सफाई, कचरे का उचित निपटान और श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने की चुनौती है। यमुना में झाग कम करने के लिए डिफोमिंग यानी झाग को तोड़ने वाले रसायनों के इस्तेमाल की तैयारी भी चर्चा में रही है। अधिकारियों के अनुसार, इस तरह के उपायों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी है। हालांकि, सतह पर झाग कम दिखाई देने का अर्थ यह नहीं है कि नदी का पानी पूरी तरह स्वच्छ हो गया है। पानी की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन प्रयोगशाला जांच और प्रदूषण के स्तर से ही किया जा सकता है।
यमुना के झाग को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हुए हैं। विपक्षी नेताओं ने नदी की सफाई के दावों पर सवाल उठाए हैं और झाग रोकने के लिए किए जा रहे काम की प्रक्रिया पर भी आपत्तियां जताई हैं। आम आदमी पार्टी के नेताओं ने डिफोमिंग अभियान से जुड़े टेंडर की प्रक्रिया पर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों पर संबंधित एजेंसियों का पक्ष और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। आरोपों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता, लेकिन नदी में बार-बार झाग लौटने से सफाई अभियान की प्रभावशीलता पर सार्वजनिक बहस जरूर तेज हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यमुना की सफाई के लिए केवल अस्थायी उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। नदी में गिरने वाले सीवेज का उपचार, औद्योगिक अपशिष्ट पर नियंत्रण, नालों की निगरानी और पर्याप्त स्वच्छ जल प्रवाह सुनिश्चित करना दीर्घकालिक समाधान के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। यदि प्रदूषित पानी लगातार नदी में पहुंचता रहेगा, तो झाग हटाने के बाद भी समस्या दोबारा सामने आ सकती है। इसलिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता, संचालन और उनसे निकलने वाले पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी जरूरी है।
छठ पूजा से पहले श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित घाटों और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। नदी में उतरने से पहले संबंधित अधिकारियों की ओर से जारी पानी की गुणवत्ता संबंधी जानकारी पर ध्यान देना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और नदी के प्रदूषित हिस्सों में अनावश्यक संपर्क से बचना चाहिए।
कालिंदी कुंज में सफेद झाग का दोबारा दिखाई देना दिल्ली के सामने मौजूद पर्यावरणीय चुनौती की याद दिलाता है। त्योहार से पहले अस्थायी सफाई उपायों के साथ-साथ नदी में प्रदूषण पहुंचने के स्रोतों पर नियंत्रण करना भी जरूरी है। आने वाले दिनों में प्रशासन की कार्रवाई और जल गुणवत्ता की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि श्रद्धालुओं के लिए घाटों पर कितनी सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है।
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