Last updated: November 1st, 2026 at 03:18 pm

दिल्ली के मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र में एक जूता बनाने वाली फैक्ट्री में लगी भीषण आग ने चार मजदूरों की जान ले ली, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दर्दनाक हादसा 30 अक्टूबर की रात हुआ था। शुरुआती जांच में फैक्ट्री के भीतर सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियां सामने आई हैं। अधिकारियों के अनुसार, इमारत में आग से बचाव के लिए जरूरी इंतजाम नहीं थे। बाहर निकलने के रास्ते बंद थे, खिड़कियों पर लोहे की ग्रिल लगी थी और सीढ़ियों पर भी सामान रखा हुआ था। पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
जानकारी के मुताबिक, आग शुक्रवार रात करीब 9:32 बजे मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित जूता फैक्ट्री के बेसमेंट में लगी। आग लगने के समय फैक्ट्री में कई मजदूर मौजूद थे। देखते ही देखते धुआं इमारत के ऊपरी हिस्सों तक फैल गया। अंदर मौजूद मजदूरों ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें मुख्य दरवाजे और अन्य निकास रास्ते बंद मिले। घना धुआं भरने के कारण मजदूरों को सांस लेने में भी परेशानी होने लगी।
सूचना मिलते ही दिल्ली अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। आग बुझाने और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए 20 से अधिक दमकल गाड़ियों को लगाया गया। बचाव अभियान के दौरान छह लोगों को बेहोशी की हालत में बाहर निकाला गया और संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने चार मजदूरों को मृत घोषित कर दिया, जबकि दो अन्य का इलाज शुरू किया गया। घायलों में विकास और हरिंदर शामिल हैं। दोनों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की पहचान अशोक कुमार, हरिहर, लाल बाबू और प्रेमचंद के रूप में हुई है। मृतकों में 25 वर्षीय अशोक बिहार के नालंदा जिले का रहने वाला था। बाकी मजदूरों में हरिहर, लाल बाबू और प्रेमचंद शामिल थे। हादसे की खबर मिलने के बाद उनके परिवारों में मातम छा गया। कई परिजन अस्पताल और फैक्ट्री के बाहर अपने रिश्तेदारों की जानकारी लेने के लिए पहुंचे।
घटना के बाद फैक्ट्री में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल उठे। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि इमारत में आग से बचाव के लिए जरूरी फायर एनओसी उपलब्ध नहीं थी। खिड़कियों और अन्य खुली जगहों को लोहे की ग्रिल और शीट से बंद किया गया था। इससे धुआं बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिला। इसके अलावा सीढ़ियों और बेसमेंट में कच्चा माल, जूते बनाने का सामान तथा कार्टन रखे हुए थे। इससे बचाव अभियान के दौरान भी दमकलकर्मियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों और घायल मजदूरों के बयान के अनुसार, आग लगने के बाद कर्मचारी बाहर निकलने के लिए मुख्य दरवाजे की ओर भागे, लेकिन दरवाजे बंद थे। इसके बाद कुछ मजदूर ऊपर की मंजिलों और छत की ओर जाने लगे। वहां भी सीढ़ियों पर सामान रखा होने के कारण रास्ता बाधित था। एक जीवित बचे मजदूर ने बताया कि उसने कपड़े को पानी से भिगोकर मुंह पर रखा, ताकि धुएं से बच सके। इसके बावजूद कई मजदूर बेहोश हो गए।
दिल्ली पुलिस ने मामले में लापरवाही और गैर इरादतन हत्या से संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने फैक्ट्री से जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 76 वर्षीय सुरेश चंद और 47 वर्षीय अशोक यादव शामिल बताए गए हैं। सुरेश चंद फैक्ट्री के मालिकों में से एक हैं, जबकि अशोक यादव इमारत का सुपरवाइजर बताया गया है। पुलिस अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
इस घटना ने औद्योगिक क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी निरीक्षण की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, फैक्ट्री के पास 2024 में जारी वैध लाइसेंस और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति का प्रमाणपत्र था, लेकिन अग्निशमन विभाग की आवश्यक एनओसी नहीं थी। अलग-अलग सरकारी एजेंसियों ने इमारत और फैक्ट्री की निगरानी की जिम्मेदारी को लेकर अपनी-अपनी भूमिका स्पष्ट की है। इस बीच पुलिस जांच जारी है और आग लगने के वास्तविक कारण का अंतिम निर्धारण अभी बाकी है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे पर दुख जताया और अधिकारियों को घायलों का उचित इलाज सुनिश्चित करने तथा मृतकों के परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित एजेंसियों को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने को भी कहा।
मंगोलपुरी की यह घटना एक बार फिर बताती है कि फैक्ट्री और औद्योगिक इमारतों में अग्नि सुरक्षा के नियमों की अनदेखी कितनी भयावह साबित हो सकती है। आपातकालीन निकास, खुली सीढ़ियां, अग्निशमन उपकरण, धुआं पहचानने वाले अलार्म और पर्याप्त वेंटिलेशन मजदूरों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया जारी है।
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