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दिल्ली में प्रदूषण से बच्चों को बचाने के लिए स्कूलों को निर्देश, पानी का छिड़काव और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना होगा

  दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने राजधानी के सभी सरकारी और
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    दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने राजधानी के सभी सरकारी और निजी स्कूलों को विशेष एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा निदेशालय ने 29 अक्टूबर को जारी एक सर्कुलर के माध्यम से स्कूलों को विंटर एक्शन प्लान 2026-27 लागू करने को कहा है। इसके तहत स्कूल परिसरों में धूल कम करने, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने, हरियाली बढ़ाने और कक्षाओं में साफ हवा की व्यवस्था सुनिश्चित करने जैसे उपाय करने होंगे।

     

    शिक्षा निदेशालय के निर्देश दिल्ली के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों पर लागू होंगे। स्कूल प्रमुखों को इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। सरकार का उद्देश्य केवल स्कूल परिसर के भीतर प्रदूषण कम करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और कर्मचारियों को भी प्रदूषण नियंत्रण अभियान से जोड़ना है।

     

    सर्कुलर के अनुसार, स्कूलों को खुले स्थानों पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव करना होगा, ताकि धूल उड़ने की समस्या कम हो सके। इसके अलावा स्कूल परिसर में निर्माण या मरम्मत से जुड़ी ऐसी गतिविधियों से बचने को कहा गया है, जिनसे अधिक धूल पैदा होती है। स्कूलों को अपने परिसर में हरित क्षेत्र यानी ग्रीन पैच बढ़ाने और पौधों की देखभाल पर भी ध्यान देना होगा।

     

    शिक्षा विभाग ने स्कूलों को विद्यार्थियों और कर्मचारियों के आवागमन में निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित करने को कहा है। स्कूल बसों, मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के साथ कारपूलिंग के प्रति भी जागरूकता फैलाई जाएगी। स्कूलों के प्रमुखों को अभिभावकों के साथ संवाद करके बच्चों के सुरक्षित और कम प्रदूषण वाले आवागमन के विकल्पों पर काम करने को कहा गया है।

     

    स्कूलों के अंदर हवा की गुणवत्ता बेहतर बनाए रखने के लिए उचित और प्रभावी वेंटिलेशन सिस्टम लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कक्षाओं और अन्य बंद स्थानों में हवा का पर्याप्त संचार हो और विद्यार्थी लंबे समय तक खराब हवा के संपर्क में न रहें। कुछ स्कूलों ने अतिरिक्त कदम उठाने पर भी विचार शुरू कर दिया है। दक्षिण दिल्ली के एक स्कूल की प्रिंसिपल ने कक्षाओं में एयर प्यूरीफायर लगाने की संभावना पर विचार करने की बात कही है।

     

    सरकार ने खुले में कचरा और जैविक अपशिष्ट जलाने की घटनाओं को रोकने पर भी जोर दिया है। स्कूलों को अपने परिसर में कचरा जलाने से बचने और कर्मचारियों को इसके नुकसान के बारे में जागरूक करने को कहा गया है। सर्दियों में सफाई, सुरक्षा और बागवानी जैसे कामों में लगे कर्मचारियों द्वारा कचरा या सूखी पत्तियां जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए बिजली से चलने वाले हीटर उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया है।

     

    दिल्ली सरकार ने स्कूलों को पटाखों के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने को कहा है। अक्टूबर और नवंबर के दौरान सुबह की प्रार्थना सभा, कक्षा चर्चाओं, जागरूकता कार्यक्रमों और नारा लेखन प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को पटाखों से होने वाले वायु और ध्वनि प्रदूषण के बारे में बताया जाएगा। नवंबर में वायु प्रदूषण पर पोस्टर निर्माण, निबंध लेखन, प्रश्नोत्तरी और अन्य गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण में अपनी भूमिका समझाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

     

    विभाग ने स्कूलों को बिजली की बचत, वस्तुओं के पुनः उपयोग और रीसाइक्लिंग को भी प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। अनावश्यक रूप से जलती लाइटें और बिजली के उपकरण बंद रखने तथा परिसर को साफ-सुथरा और हरा-भरा बनाए रखने पर जोर दिया गया है। दिसंबर में धूल नियंत्रण से जुड़ी गतिविधियां आयोजित होंगी, जबकि जनवरी 2027 में ध्वनि प्रदूषण के प्रति जागरूकता के लिए पेंटिंग, पोस्टर और रोल-प्ले जैसी गतिविधियां कराई जाएंगी। फरवरी 2027 में स्वच्छ और हरित स्कूल वातावरण को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

     

    अभिभावकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अक्टूबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच होने वाली पेरेंट-टीचर मीटिंग (PTM) और स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) की बैठकों में प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर चर्चा करने को कहा गया है। इससे विद्यार्थियों को स्कूल के साथ-साथ घर और आसपास के वातावरण में भी स्वच्छता तथा प्रदूषण नियंत्रण की आदतें अपनाने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।

     

    शिक्षा निदेशालय ने स्कूल प्रमुखों को हर महीने की अंतिम तारीख तक निर्धारित गूगल शीट के माध्यम से अपनी गतिविधियों और लागू किए गए उपायों की रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य स्कूलों में जारी कामकाज की निगरानी करना और यह सुनिश्चित करना है कि केवल आदेश जारी करने तक कार्रवाई सीमित न रहे।

     

    दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण का असर बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष रूप से पड़ सकता है। छोटे बच्चों और सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे विद्यार्थियों को अधिक सावधानी की जरूरत होती है। ऐसे में स्कूलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। सरकार का यह विंटर एक्शन प्लान फरवरी 2027 तक जारी रहेगा और इसके प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन के साथ संबंधित शिक्षा अधिकारियों पर भी होगी।

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