Human Live Media

HomeNewsदिल्ली में 2.1 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार

दिल्ली में 2.1 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार

    दिल्ली में करीब 2.1 करोड़ रुपये की कथित डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने दो
dnmn429c_cbi_625x300_01_December_25

 

Table of Contents

     

    दिल्ली में करीब 2.1 करोड़ रुपये की कथित डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों पर साइबर अपराधियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने और ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित करने में मदद करने का संदेह है। पुलिस ने जांच के दौरान मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड और चेकबुक सहित कई सामान बरामद किए हैं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ठगी की रकम किन खातों में भेजी गई और इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे।

     

    डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, सीमा शुल्क विभाग या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे पीड़ित से कहते हैं कि उसका नाम किसी आपराधिक मामले में सामने आया है या उसके बैंक खाते का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों में हुआ है। इसके बाद गिरफ्तारी, जेल या संपत्ति जब्त होने की धमकी देकर उससे पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता है।

     

    इस तरह की ठगी में अपराधी अक्सर वीडियो कॉल का इस्तेमाल करते हैं। वे फर्जी पहचान पत्र दिखाते हैं और सरकारी कार्यालय जैसा माहौल बनाकर पीड़ित को विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि वह किसी वास्तविक जांच का हिस्सा है। कई बार पीड़ित को परिवार और दोस्तों से बात करने से भी रोका जाता है, ताकि वह किसी से सलाह न ले सके। डर और मानसिक दबाव में आकर लोग अपनी जमा-पूंजी तक ठगों के खातों में भेज देते हैं।

     

    दिल्ली में सामने आए इस मामले में पुलिस की जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू बैंक खातों के जरिए रकम का लेन-देन है। साइबर अपराधी अक्सर अपने नाम पर पैसा लेने के बजाय दूसरे लोगों के खातों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इन खातों में ठगी की रकम जमा कराई जाती है और फिर उसे कई खातों में भेज दिया जाता है या नकदी के रूप में निकाल लिया जाता है। इस तरीके से असली अपराधियों की पहचान छिपाने की कोशिश की जाती है।

     

    पुलिस के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सोनू खान, उम्र 36 वर्ष, और अर्जुन चौधरी, उम्र 38 वर्ष, के रूप में हुई है। जांच के दौरान सोनू खान के पास से तीन मोबाइल फोन, छह डेबिट कार्ड और दस चेकबुक बरामद किए गए। अर्जुन चौधरी के पास से भी एक मोबाइल फोन मिला। पुलिस अब इन उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि संदिग्ध बैंक खातों और उनसे जुड़े लेन-देन की जानकारी जुटाई जा सके।

     

    जांच में एक बैंक खाते से जुड़े लेन-देन भी सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, 12 अक्टूबर को संबंधित खाते में 98,592 रुपये जमा हुए थे। उसी दिन 49,000 रुपये नकद निकाले गए, जबकि शेष रकम चेक के माध्यम से निकाली गई। यह लेन-देन लगभग 2.10 करोड़ रुपये की कथित डिजिटल अरेस्ट ठगी की जांच के दौरान सामने आया। हालांकि, इस एक खाते में हुए लेन-देन को पूरी ठगी की रकम नहीं माना जा सकता। पुलिस पूरे वित्तीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

     

    जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, खाताधारकों के केवाईसी दस्तावेज, मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की मदद से आरोपियों की भूमिका का पता लगा रही हैं। यह भी जांच की जा रही है कि बैंक खातों का इस्तेमाल जानबूझकर किया गया था या खाताधारकों को किसी तरह से गुमराह किया गया। केवल किसी खाते में संदिग्ध रकम आने से किसी व्यक्ति का अपराध साबित नहीं होता; उसकी भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच आवश्यक है।

     

    इस मामले ने एक बार फिर साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता की जरूरत को सामने रखा है। विशेषज्ञों के अनुसार, कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को कानूनी रूप से गिरफ्तार नहीं करती और न ही जांच के नाम पर निजी बैंक खाते में पैसे जमा कराने का निर्देश देती है। यदि कोई व्यक्ति खुद को अधिकारी बताकर गिरफ्तारी या संपत्ति जब्त करने की धमकी दे, तो घबराकर पैसा ट्रांसफर नहीं करना चाहिए।

     

    यदि कोई व्यक्ति ऐसी ठगी का शिकार हो जाता है, तो उसे तुरंत अपने बैंक से संपर्क करना चाहिए और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत की जा सकती है। जल्द शिकायत करने से संदिग्ध लेन-देन को रोकने की संभावना बढ़ सकती है, हालांकि रकम वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।

     

    दिल्ली पुलिस की यह कार्रवाई साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों की भूमिका पर ध्यान आकर्षित करती है। फिलहाल जांच जारी है और पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित 2.10 करोड़ रुपये की ठगी के पीछे मुख्य आरोपी कौन हैं तथा गिरफ्तार व्यक्तियों का इस नेटवर्क से किस स्तर तक संबंध था।

    Loading

    Comments are off for this post.