Last updated: July 30th, 2026 at 05:06 pm

नोएडा में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक रिटायर्ड नेवी अधिकारी से कथित तौर पर ₹2.23 करोड़ की धोखाधड़ी की गई। आरोप है कि साइबर ठगों ने निवेश के जरिए भारी मुनाफा कमाने का लालच देकर पीड़ित को अपने जाल में फंसाया और धीरे-धीरे बड़ी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा ली। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित को कथित तौर पर एक ऑनलाइन निवेश योजना से जुड़े लोगों ने संपर्क किया था। ठगों ने निवेश के माध्यम से कम समय में बड़ा मुनाफा कमाने का दावा किया। शुरुआत में पीड़ित को निवेश से जुड़े कुछ ऐसे आंकड़े या रिटर्न दिखाए गए, जिससे उसे योजना पर भरोसा हो गया। इसके बाद उसे अधिक राशि निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया।
साइबर अपराधियों ने कथित तौर पर पीड़ित को अलग-अलग चरणों में पैसे जमा करने के लिए कहा। निवेश पर अधिक लाभ मिलने की उम्मीद में पीड़ित ने उनकी बातों पर भरोसा किया और बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। जब पीड़ित को अपने निवेश की वास्तविक स्थिति पर संदेह हुआ और उसने रकम निकालने की कोशिश की, तब उसे कथित तौर पर अतिरिक्त शुल्क, टैक्स या अन्य भुगतान के नाम पर और पैसे जमा करने के लिए कहा गया।
इसके बाद पीड़ित को एहसास हुआ कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है। आरोप है कि कुल मिलाकर उसके साथ ₹2.23 करोड़ की धोखाधड़ी हुई। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई और मामले की जांच शुरू की गई।
साइबर ठगी के इस मामले ने एक बार फिर ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाले अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पिछले कुछ समय में साइबर अपराधी लोगों को शेयर बाजार, ट्रेडिंग, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य ऑनलाइन निवेश योजनाओं के नाम पर ठगी का शिकार बना रहे हैं। अपराधी अक्सर सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप या फोन कॉल के माध्यम से लोगों से संपर्क करते हैं।
ऐसे मामलों में ठग शुरुआत में पीड़ित का भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। कई बार उन्हें किसी ऑनलाइन ग्रुप में जोड़ दिया जाता है, जहां निवेश से जुड़े फर्जी मुनाफे के स्क्रीनशॉट या अन्य लोगों के सफल निवेश के दावे दिखाए जाते हैं। इसके बाद पीड़ित को बड़ी रकम निवेश करने के लिए प्रेरित किया जाता है।
नोएडा पुलिस अब मामले की जांच करते हुए उन बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है, जिनके जरिए रकम ट्रांसफर की गई। पुलिस साइबर अपराधियों के नेटवर्क और उनके सहयोगियों की पहचान करने की कोशिश भी कर सकती है। यदि रकम कई खातों में ट्रांसफर की गई है, तो जांच एजेंसियां उन खातों की भी जांच कर सकती हैं।
पुलिस के लिए ऐसे मामलों में डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण होते हैं। पीड़ित के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, चैट, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य डिजिटल जानकारी से अपराधियों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर और बैंक खाते किसके नाम पर हैं।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन निवेश करते समय लोगों को बेहद सावधानी बरतनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा कम समय में असामान्य रूप से अधिक मुनाफे का दावा किया जाए तो उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है। निवेश करने से पहले कंपनी या प्लेटफॉर्म की वैधता और नियामक स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए।
विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए। यदि कोई व्यक्ति निवेश से पैसा निकालने के लिए अतिरिक्त टैक्स या शुल्क के नाम पर लगातार पैसे मांग रहा है, तो यह साइबर ठगी का संकेत हो सकता है।
नोएडा में सामने आया यह मामला साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को दर्शाता है। खासकर ऐसे लोग जो रिटायरमेंट के बाद अपनी बचत को निवेश करना चाहते हैं, वे साइबर अपराधियों के निशाने पर आ सकते हैं। बड़ी रकम निवेश करने से पहले स्वतंत्र वित्तीय सलाह लेना और आधिकारिक स्रोतों से जानकारी हासिल करना बेहद जरूरी है।
पुलिस मामले की जांच कर रही है और कथित साइबर ठगों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। ₹2.23 करोड़ की कथित ठगी के इस मामले में आगे की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अपराध में कितने लोग शामिल थे और रकम कहां-कहां ट्रांसफर की गई। पुलिस की जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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