Last updated: October 31st, 2026 at 03:21 pm

पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (NMCH) में कथित रैगिंग मामले को लेकर कॉलेज प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। जांच के दौरान वर्ष 2024 बैच के आठ विद्यार्थियों को आरोपों से मुक्त कर दिया गया है। वहीं, इन्हीं आठ विद्यार्थियों को कॉलेज की एंटी रैगिंग स्क्वायड टीम में शामिल कर निगरानी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। दूसरी ओर, वर्ष 2025 बैच के विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला छठ के बाद लिया जाएगा। कॉलेज प्रशासन ने फिलहाल उन्हें हॉस्टल खाली करने के आदेश से राहत दी है।
शनिवार, 31 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के अनुसार, कॉलेज में प्राचार्य प्रोफेसर डॉ. उषा कुमारी की अध्यक्षता में एंटी रैगिंग कमेटी और एंटी रैगिंग स्क्वायड की बैठक हुई। इस बैठक में वर्ष 2026 में एमबीबीएस में नए नामांकित 100 से अधिक छात्र-छात्राएं उपस्थित हुए। कमेटी के सामने इन विद्यार्थियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके साथ किसी प्रकार की रैगिंग नहीं हुई है। कॉलेज प्रशासन ने उनके जवाब और उपलब्ध तथ्यों को रिकॉर्ड में लिया।
बैठक के दौरान वर्ष 2024 बैच के विद्यार्थियों के मामले की भी समीक्षा की गई। प्राचार्य के अनुसार, विद्यार्थियों की ओर से दिए गए जवाब और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आठ छात्रों को कथित रैगिंग मामले से आरोपमुक्त कर दिया गया। इन छात्रों में रौशन कुमार, प्रिंस गौरव, गौरव कुमार, अरुण कुमार, अरुण राज, शशि कुमार, धर्मवीर यादव और शिवम प्रकाश शामिल हैं।
कॉलेज प्रशासन ने इन आठ विद्यार्थियों को एंटी रैगिंग स्क्वायड में शामिल करने का फैसला किया है। अब ये छात्र कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों के स्तर पर होने वाली गतिविधियों पर नजर रखेंगे। यदि उन्हें रैगिंग, दुर्व्यवहार या किसी अनुचित गतिविधि की जानकारी मिलती है, तो वे इसकी सूचना सीधे कॉलेज प्रशासन को देंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतों को समय रहते सामने लाना और विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है।
वर्ष 2025 बैच के विद्यार्थियों को भी अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था। कई छात्र-छात्राएं अपने अभिभावकों के साथ बैठक में पहुंचे। उन्होंने कमेटी के सामने अपनी अनुपस्थिति और परिस्थितियों से संबंधित दलीलें रखीं। कुछ विद्यार्थियों ने बताया कि वे बीमारी के कारण कॉलेज नहीं आ सके थे, जबकि कुछ ने कहा कि वे उस समय पटना में मौजूद नहीं थे। एक विद्यार्थी ने उत्तराखंड से आने की बात कहते हुए अपनी यात्रा से संबंधित ट्रेन टिकट भी दिखाया।
कमेटी ने सभी विद्यार्थियों की बातें सुनने के बाद वर्ष 2025 बैच के छात्र-छात्राओं को प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट स्तर का शपथ पत्र जमा करने का निर्देश दिया है। इसमें उन्हें यह लिखकर देना होगा कि कथित रैगिंग मामले से उनका कोई संबंध नहीं है और भविष्य में भी वे ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे। कॉलेज प्रशासन ने बताया कि इस बैच की कक्षाएं तीन महीने तक निलंबित रखने के आदेश पर अगला फैसला छठ के बाद लिया जाएगा।
इस बीच, वर्ष 2025 बैच के विद्यार्थियों को हॉस्टल खाली करने का पहले जारी किया गया आदेश वापस ले लिया गया है। इससे उन्हें फिलहाल छात्रावास में रहने की राहत मिली है। इससे पहले वर्ष 2023 और 2024 बैच की छात्राओं को कक्षाओं से निलंबित करने तथा हॉस्टल खाली करने के आदेश भी कॉलेज प्रशासन ने गुरुवार की बैठक के बाद रद्द कर दिए थे।
यह पूरा विवाद कॉलेज से जुड़े कथित ‘रूलबुक-2026’ दस्तावेज के सामने आने के बाद शुरू हुआ था। इस दस्तावेज में नए विद्यार्थियों के लिए वरिष्ठ छात्रों के साथ व्यवहार और बातचीत से जुड़े कथित निर्देश शामिल होने की बात कही गई थी। इसके बाद रैगिंग की शिकायतें सामने आईं और मामला राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, ऑल इंडिया एंटी रैगिंग कमेटी तथा बिहार ग्रीवांस सेल तक पहुंचा। कॉलेज प्रशासन ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अलग-अलग बैच के विद्यार्थियों से पूछताछ शुरू की थी।
मामले में कथित रैगिंग के मुख्य सूत्रधार की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। प्राचार्य ने बताया कि उसकी तलाश जारी है। कॉलेज प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि कथित दस्तावेज किसने तैयार किया, इसे किसने प्रसारित किया और शिकायतों में जिन घटनाओं का उल्लेख है, उनमें किन लोगों की भूमिका थी।
NMCH प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर कॉलेज परिसर में रैगिंग रोकना और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर जांच के दौरान किसी निर्दोष विद्यार्थी की पढ़ाई और भविष्य प्रभावित न हो, इसका भी ध्यान रखना होगा। छठ के बाद वर्ष 2025 बैच को लेकर होने वाला फैसला इस पूरे मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगा।
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