Last updated: July 7th, 2026 at 11:53 am

जकार्ता/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा, प्रौद्योगिकी और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। दोनों देशों ने अपनी व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में क्षेत्रीय सुरक्षा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग, आर्थिक संबंधों और निवेश बढ़ाने सहित कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक के दौरान सबसे महत्वपूर्ण समझौता भारत की सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली से जुड़ा रहा। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को नई दिशा देते हुए ब्रह्मोस मिसाइल से संबंधित समझौते को अंतिम रूप दिया। इसके साथ ही स्वदेशी अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल प्रणाली, रक्षा प्रौद्योगिकी, समुद्री सुरक्षा और रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगा तथा दोनों देशों के रक्षा संबंधों को नई ऊंचाई देगा।
दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों, इस्पात उद्योग, कृषि और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी कई समझौते किए। भारत और इंडोनेशिया निकेल, स्टील तथा अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के उत्पादन और प्रसंस्करण में सहयोग बढ़ाएंगे। इसके अलावा समुद्री संपर्क, आपदा प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा और निवेश को बढ़ावा देने के लिए भी कई संयुक्त पहल पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने कहा कि आर्थिक सहयोग को नई गति देने के लिए व्यापार और निवेश के अवसरों का विस्तार किया जाएगा।
संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक विरासत और आपसी विश्वास पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षित समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने भी भारत को इंडोनेशिया का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग को और व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का जकार्ता में भव्य स्वागत किया गया। इंडोनेशियाई वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने उनके विमान को एस्कॉर्ट किया, जबकि राष्ट्रपति प्रबोवो स्वयं एयरपोर्ट पर उनकी अगवानी के लिए पहुंचे। प्रधानमंत्री को औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। यह विशेष स्वागत दोनों देशों के मजबूत संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान इंडोनेशिया की संसद को भी संबोधित करेंगे और योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रंबानन मंदिर परिसर का दौरा करेंगे। भारत इस यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के संरक्षण और पुनरुद्धार में भी सहयोग देगा। दोनों देशों ने सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने पर भी सहमति व्यक्त की है।
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भूमिका को भी मजबूत करेगा। रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में हुए समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दे सकते हैं। इसके साथ ही यह यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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