Last updated: September 9th, 2026 at 04:12 pm

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 11 सितंबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे। यह बैठक 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले होनी है। दोनों नेताओं की बातचीत में भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और आर्थिक सहयोग के साथ कई रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। रूस के क्रेमलिन ने भी दोनों नेताओं की शुक्रवार को बैठक की पुष्टि की है।
पुतिन की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत और रूस के संबंधों में ऊर्जा व्यापार का महत्व काफी बढ़ा है। आने वाली बातचीत में दोनों पक्ष ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को अधिक व्यापक बनाने के रास्तों पर विचार कर सकते हैं। रूस के साथ कच्चे तेल के अलावा परमाणु ऊर्जा और अन्य ऊर्जा परियोजनाओं में सहयोग भी चर्चा का हिस्सा हो सकता है।
रक्षा क्षेत्र भी बैठक के प्रमुख विषयों में रहने की संभावना है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमान से जुड़े सहयोग और तकनीकी पहलुओं पर बातचीत कर सकते हैं। इसके अलावा S-400 वायु रक्षा प्रणाली और अन्य रक्षा परियोजनाओं पर भी चर्चा की संभावना है। हालांकि किसी नई रक्षा डील को बैठक से पहले तय मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि अंतिम निर्णय आधिकारिक बातचीत और समझौतों के बाद ही स्पष्ट होंगे।
भारत और रूस ब्रह्मोस मिसाइल के उन्नयन पर भी सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं। रूसी पक्ष के अनुसार, ब्रह्मोस की क्षमताओं और प्रभावशीलता को बढ़ाने तथा उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए आगे का काम किया जा सकता है। यह सहयोग दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे संयुक्त रक्षा उत्पादन और तकनीकी साझेदारी को नए स्तर तक ले जाने की कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।
आर्थिक और व्यापारिक संबंध भी बैठक के महत्वपूर्ण हिस्से होंगे। दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने, निवेश के नए अवसर तलाशने और व्यापार में मौजूद असंतुलन को कम करने पर चर्चा कर सकते हैं। इसके साथ ही दुर्लभ खनिजों यानी rare earth minerals के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं भी सामने आई हैं। इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उपकरणों, ऊर्जा तकनीक और कई आधुनिक उद्योगों में किया जाता है।
परमाणु ऊर्जा सहयोग भी भारत-रूस संबंधों का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और भविष्य में सहयोग के नए क्षेत्रों पर काम करने की संभावना है। इसके अलावा वित्तीय सहयोग, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और निवेश बढ़ाने जैसे विषय भी व्यापक आर्थिक एजेंडे का हिस्सा हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी दोनों नेता विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत लगातार बातचीत और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर देता रहा है। रूस ने भी भारत की शांति प्रयासों से जुड़ी भूमिका के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया है। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा परिस्थितियों पर चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पुतिन की यात्रा का एक बड़ा हिस्सा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से जुड़ा है। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन वैश्विक अर्थव्यवस्था, विकास, व्यापार, ऊर्जा और बहुपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा का मंच बनेगा। पुतिन की मोदी से द्विपक्षीय बैठक को इसी व्यापक कूटनीतिक गतिविधि के बीच भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा के अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
यह स्पष्ट है कि शुक्रवार की मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा और ऊर्जा के साथ व्यापार, निवेश, परमाणु सहयोग और उभरती तकनीकों जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है। हालांकि बैठक के बाद जारी होने वाले आधिकारिक बयान और समझौते ही यह तय करेंगे कि किन मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए गए।
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