Last updated: September 9th, 2026 at 04:22 pm

उत्तर प्रदेश में सहारनपुर की एक मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दो अन्य मस्जिदें प्रशासनिक जांच और रिकॉर्ड की पड़ताल के दायरे में आ गई हैं। संभल की बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद का भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने निरीक्षण किया है, जबकि मुरादाबाद की मुस्तफा मस्जिद को निर्माण से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए नोटिस दिया गया है। हालांकि, इन दोनों मामलों में अभी किसी ध्वस्तीकरण या अंतिम कार्रवाई का आदेश सामने नहीं आया है।
संभल में ASI की टीम ने मंगलवार को चौधरी सराय इलाके में स्थित बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद का निरीक्षण किया। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई एक शिकायत के बाद शुरू हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि मस्जिद का निर्माण ऐसी जमीन पर किया गया है, जिसका संबंध जामा मस्जिद की भूमि से बताया गया है। प्रशासन ने कहा है कि मामले में भूमि रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध दस्तावेजों की जांच की जा रही है। ASI की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया के बारे में फैसला किया जाएगा।
ASI के अधिकारियों ने मस्जिद और शिकायत में बताए गए स्थल का निरीक्षण किया है। अधिकारियों के अनुसार, टीम अपनी जांच के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगी। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं। भूमि का वास्तविक रिकॉर्ड, निर्माण से संबंधित दस्तावेज और अन्य कानूनी पहलुओं की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
मुरादाबाद में भी प्रशासन ने मुस्तफा मस्जिद के निर्माण से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (MDA) ने पाकबड़ा स्थित मस्जिद को नोटिस जारी कर निर्माण संबंधी मंजूरी और अन्य रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है। अधिकारियों की ओर से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भवन का निर्माण स्वीकृत नक्शे और लागू नियमों के अनुसार हुआ था या नहीं। मस्जिद के देखरेख करने वाले व्यक्ति का कहना है कि यह ढांचा निजी जमीन पर कई दशक पहले बनाया गया था।
इन घटनाओं की पृष्ठभूमि में सहारनपुर की मस्जिद का मामला भी महत्वपूर्ण है। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बनी अनधिकृत संरचना बताया था। स्थानीय अदालत में मस्जिद प्रबंधन की अपील खारिज होने के बाद सितंबर में उसका ध्वस्तीकरण किया गया। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई, जबकि मस्जिद के मुतवल्ली ने प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं और मामले को आगे अदालत में चुनौती देने की बात कही है।
सहारनपुर की कार्रवाई के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और निर्माण की वैधता को लेकर चर्चा तेज हुई है। संभल और मुरादाबाद के मामलों में फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर जांच, निरीक्षण और दस्तावेजों की मांग की प्रक्रिया चल रही है। इसलिए इन मामलों को सहारनपुर जैसी अंतिम कार्रवाई के रूप में देखना उचित नहीं होगा। किसी भी आगे की कार्रवाई का आधार जांच और उपलब्ध कानूनी रिकॉर्ड होंगे।
मामले ने राजनीतिक प्रतिक्रिया भी पैदा की है। संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान बर्क ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों से कानून और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने की मांग की है। दूसरी ओर, प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों के आधार पर संबंधित रिकॉर्ड और स्थलों की जांच की जा रही है।
संभल में ASI की रिपोर्ट और मुरादाबाद में मांगे गए निर्माण दस्तावेज इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण होंगे। यदि जांच में किसी नियम के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई हो सकती है, लेकिन अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। प्रशासन की अगली कार्रवाई जांच और दस्तावेजों में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।
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