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शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट, सेंसेक्स 813 अंक टूटा; निफ्टी 23,500 के नीच

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 9 सितंबर 2026 को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक स्तर
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भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 9 सितंबर 2026 को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार के माहौल को प्रभावित किया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 813.35 अंक यानी 1.08 प्रतिशत गिरकर 74,764.23 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 में 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 23,431.50 के स्तर पर बंद हुआ। दोनों प्रमुख सूचकांकों का यह बंद स्तर 11 जून के बाद का सबसे निचला स्तर रहा।

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    बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बढ़ी चिंता से आया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। भारत कच्चे तेल के आयात पर काफी निर्भर है, इसलिए तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से महंगाई, आयात बिल और अर्थव्यवस्था की लागत को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी। इसी वजह से बाजार में जोखिम लेने की क्षमता कमजोर हुई और कई क्षेत्रों में बिकवाली देखने को मिली।

     

    रुपये की कमजोरी ने भी बाजार की धारणा पर असर डाला। बुधवार को भारतीय मुद्रा 95 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गई और लगभग 95.10 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण डॉलर की मांग तथा आयात संबंधी चिंताओं में वृद्धि हुई। कारोबारियों के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक ने रुपये में अत्यधिक गिरावट को सीमित करने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप किया हो सकता है, हालांकि इस तरह के संभावित हस्तक्षेप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

     

    शेयर बाजार में सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों पर खास दबाव रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में लगभग 3.2 प्रतिशत की गिरावट आई। एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और टीसीएस जैसे बड़े आईटी शेयरों में बिकवाली हुई। अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक स्तर पर तकनीकी कंपनियों के लिए मांग संबंधी चिंताओं ने भी इस क्षेत्र की धारणा कमजोर की।

     

    बाजार की व्यापक तस्वीर भी कमजोर रही। प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में बड़ी संख्या में गिरावट देखने को मिली, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव रहा। हालांकि ऊर्जा और मेटल से जुड़े कुछ शेयरों में तेजी देखी गई। अदाणी एंटरप्राइजेज, अदाणी पोर्ट्स और टाटा स्टील जैसे कुछ शेयरों ने बाजार की व्यापक गिरावट के बीच बेहतर प्रदर्शन किया।

     

    विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। वैश्विक अनिश्चितता और रुपये की कमजोरी के बीच विदेशी पूंजी के प्रवाह को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी है। इसके साथ ही घरेलू बाजार में जारी आईपीओ गतिविधियों को लेकर भी कुछ बाजार विश्लेषकों का मानना है कि नई पेशकशों में पैसा जाने से द्वितीयक बाजार में उपलब्ध तरलता पर असर पड़ सकता है। हालांकि बाजार की मौजूदा गिरावट को किसी एक कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा; कच्चा तेल, भू-राजनीतिक तनाव, रुपये की कमजोरी, आईटी शेयरों में बिकवाली और निवेशकों की सतर्कता ने मिलकर दबाव बनाया है।

     

    आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर रहेगी। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर के आसपास या उससे ऊपर रहती हैं, तो भारतीय बाजार में महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता बनी रह सकती है। दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बाजार को कुछ राहत दे सकती है। फिलहाल लगातार तीन सत्रों की गिरावट के बाद निवेशकों के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा हुआ है और आगे की दिशा वैश्विक संकेतों पर काफी हद तक निर्भर रहने की संभावना है।

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