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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की वकालत की, आतंकवाद पर वैश्विक एकजुटता का किया आह्वान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में व्यापक सुधार की
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में समयानुकूल बदलाव जरूरी हैं। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने समावेशी विकास, तकनीक तक समान पहुंच, आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग और मुक्त एवं सुरक्षित हिंद-प्रशांत क्षेत्र जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इस दौरान भारत और इंडोनेशिया ने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को और मजबूत करने तथा रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

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    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज की दुनिया तेजी से बदल रही है, लेकिन कई वैश्विक संस्थाएं अभी भी पुराने ढांचे के अनुसार काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार समय की मांग है ताकि विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में उचित प्रतिनिधित्व मिल सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एक अधिक प्रतिनिधित्व वाली और प्रभावी संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था ही भविष्य की चुनौतियों का बेहतर समाधान दे सकती है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने आतंकवाद को पूरी मानवता के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ किसी भी प्रकार का दोहरा मापदंड स्वीकार नहीं किया जा सकता। भारत और इंडोनेशिया ने संयुक्त बयान में सभी प्रकार के आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए इसके खिलाफ समन्वित वैश्विक कार्रवाई का समर्थन किया। दोनों देशों ने आतंकवादी वित्तपोषण, ऑनलाइन कट्टरपंथ और नई तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई।

    प्रधानमंत्री मोदी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और मुक्त समुद्री मार्गों के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि समुद्री व्यापार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और रणनीतिक संपर्क को और मजबूत करने का संकल्प दोहराया। दोनों देशों के बीच हाल ही में रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बंदरगाह विकास सहित कई क्षेत्रों में समझौतों पर भी सहमति बनी है।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत की विकास यात्रा का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भारत डिजिटल नवाचार, आर्थिक प्रगति और समावेशी विकास के मॉडल पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल अपनी प्रगति नहीं, बल्कि वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ मिलकर साझा विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने तकनीक को मानव कल्याण का माध्यम बताते हुए कहा कि इसका लाभ सभी देशों तक समान रूप से पहुंचना चाहिए।

    भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को भी इस यात्रा के दौरान नई मजबूती मिली। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रंबानन मंदिर परिसर में भारत समर्थित संरक्षण परियोजना का शुभारंभ किया। दोनों नेताओं ने साझा सांस्कृतिक विरासत को दोनों देशों के रिश्तों की मजबूत नींव बताया। इस पहल को सांस्कृतिक कूटनीति के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें भारत की वैश्विक कूटनीतिक प्राथमिकताओं का स्पष्ट संदेश भी दिखाई दिया। संयुक्त राष्ट्र सुधार, आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने जैसे विषय आने वाले समय में भारत की विदेश नीति के प्रमुख आधार बने रहेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, इंडोनेशिया यात्रा से भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक स्थिति को नई मजबूती मिली है तथा दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हुई है।

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